वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी राम संजीवन ठाकुर का 104 वर्ष की आयु में निधन

Smart News Team, Last updated: Fri, 4th Jun 2021, 5:17 PM IST
  • स्वतन्त्रता सेनानी और राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित राम संजीवन ठाकुर की मृत्यु शुक्रवार सुबह 10:30 बजे हो गई. उनकी आयु 104 साल थी. उन्होंने कालाबाड़ी स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली. राम संजीवन ठाकुर के पौत्र ने बताया कि वे करीब डेढ़ महीने से बीमार चल रहे थे. और पिछले तीन चार दिनों से उन्होंने अन्न पानी भी त्याग दिया था. जिस कारण उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था.
स्वतन्त्रता सेनानी और राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित राम संजीवन ठाकुर करीब डेढ़ महीने से बीमार चल रहे थे.

मुजफ्फरपुर- स्वतन्त्रता सेनानी और राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित राम संजीवन ठाकुर की मृत्यु शुक्रवार सुबह 10:30 बजे हो गई. राम संजीवन ठाकुर की आयु 104 साल थी. जिन्होंने कालाबाड़ी स्थित अपने घर पर अंतिम सांसे ली. राम संजीवन ठाकुर के पौत्र ने बताया कि वे करीब डेढ़ महीने से बीमार चल रहे थे. और पिछले तीन चार दिनों से उन्होंने अन्न पानी भी त्याग दिया था. जिस कारण उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने अपनी अन्तिम सांसे ली.

मौत की खबर मिलते ही नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों ने फोन कर और विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यम से शोक जताया और उनके आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. सभी ने बोला कि ये जिले की अपूर्णीय छती है. हम सब ने जिले के सबसे सम्मानीय और वरिष्ठ अभिभावक को खो दिया है. राम संजीवन ठाकुर करीब सात वर्षों तक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे. साथ ही अभी वे जिला स्वतन्त्रता सेनानी संगठन, बिहार राज्य स्वतन्त्रता सेनानी संगठन, दुकान कर्मचारी संघ, बिहार प्रदेश खादी चर्म उद्योग कर्मचारी संघ, बिहार प्रदेश उपभोक्ता सेवा संघ, उत्तर बिहार सेनेमा कर्मचारी यूनियन और भारत वैगन राष्ट्रीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष थे. राम संजीवन ठाकुर अखिल भारतीय श्रमिक कल्याण संघ के मंत्री और जिला भारत सेवक संघ के महामंत्री भी रहे.

मुजफ्फरपुर गैंगरेप और मर्डर केस: शराब माफिया ने वारदात को दिया था अंजाम

राम संजीवन ठाकुर, गांधी जी द्वारा चलाया गया 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेते हुए गिरफ्तार हुए. जब उनकी आयु महज 25 वर्ष थी. उन्हें मुजफ्फरपुर के ही जेल में गिरफ्तार कर रखा गया. लेकिन इससे वे जरा भी भयभीत हुए बिना जेल से निकलते ही फिर से आंदोलन से जुड़ कर काम करने लगे. राम संजीवन ठाकुर सादा जीवन में विश्वास करने वाले व्यक्ति थे. आजीवन वो साइकिल से ही कही आते जाते थे. साथ ही साइकिल से घुम घुम कर जिले भर में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक बनाने का काम करते थे. राम संजीवन ठाकुर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से ताम्र पत्र और पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम से सम्मनित हुए थे.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें