नियोजित शिक्षकों की ट्रेनिंग को दिए खर्च का सरकार ने मांगा हिसाब, रिकॉर्ड गायब

Smart News Team, Last updated: Thu, 24th Sep 2020, 10:21 AM IST
  • नियोजित शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए दिए खर्च का सरकार ने हिसाब मांगा है.  हिसाब. 74 डीएलएड सेंटरों के रिकार्ड गायब हैं और ढाई करोड़ खर्च का हिसाब नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा है कि खर्च का ब्योरा नहीं मिल रहा. विभार ने इस पर रिपोर्ट मांगी है. कई विभागीय अधिकारियों और लिपिकों पर कार्रवाई हो सकती है.
नियोजित शिक्षकों की ट्रेनिंग को दिए खर्च का सरकार ने मांगा हिसाब, रिकॉर्ड गायब

अनामिका, मुजफ्फरपुर. सरकार ने अनट्रेंड शिक्षकों को एनआईओएस से 18 महीने के विशेष डीएलएड कोर्स कराने के लिए ढाई करोड़ रुपये दिए थे. इसी के संबंधित रिकॉर्ड और रकम के खर्च का ब्योरा जिले के 74 ट्रेनिंग सेंटर से गायब हैं. रिकॉर्ड मांगने पर इनके गायब होने की जानकारी दी गई. इसी की बाद आशंका जताई जा रही है कि राशि का गबन हुआ है. कोर्स खत्म होने और डिग्री मिलने के डेढ़ साल बाद इस फाइल की खोज शुरू हुई है.

जिले में 18 महीने के इस कोर्स में 14 हजार शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई थी. विभिन्न हाईस्कूल में इसके लिए 74 केन्द्र बनाए गए थे, जिन पर सरकारी और प्राइवेट स्कूल के मिलाकर 14 हजार शिक्षक नामांकित थे. इन शिक्षकों की परीक्षा भी हो चुकी है और डीएलएड की डिग्री भी मिल चुकी है. अब राज्य सरकार ने जब इन केंद्रों पर हुए खर्च का हिसाब मांगा है तो रिकार्ड गायब होने का मामला सामने आया है.

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एनआईओएस से जिले को इन केन्द्रों को चलाने, जिसमें केन्द्र पर संसाधन में खर्च के साथ ही मेंटर, आरपी का मानदेय भी शामिल था, ढाई करोड़ से अधिक की राशि दी गई. मार्च 2019 तक का यह कोर्स था. रिकार्ड गायब होने से कई अधिकारियों की गर्दन फंसती दिख रही है. बीईपी के राज्य कार्यक्रम अधिकारी संजय सिंह की ओर से डीपीओ समग्र शिक्षा अभियान से इन केन्द्रों पर हुए खर्च का हिसाब मांगा गया है. बीईपी को ही इन केन्द्रों के संचालन और खर्च की जवाबदेही दी गई थी.

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इधर, डीपीओ डॉ. अमरेन्द्र ने कहा कि हमारे कार्यालय में इससे संबंधित एक भी फाइल नहीं है. हमने दिसम्बर 2019 में ही इसकी सूचना डीईओ को देकर मार्गदर्शन मांगा था. वहीं, डीईओ अब्दुससलाम अंसारी ने कहा कि यह संचालन बीईपी से होना था. ऐसे में डीईओ कार्यालय में यह फाइल नहीं है. इधर, केन्द्र संचालन से जुड़े शिक्षकों ने कहा कि किसी भी केन्द्र पर बीईपी की ओर से मेंटर या आरपी के लिए मानदेय नहीं दिया गया.

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