मुजफ्फरपुर में बेटियों ने खोजा पढ़ने का नया तरीका, चलती है किशोरी मंडल पाठशाला

Smart News Team, Last updated: Thu, 29th Jul 2021, 12:57 PM IST
  • मुजफ्फरपुर की बेटियों ने कोविड और बंद स्कूलों के बीच पढ़ने का एक नया तरीका खोज निकाला है. जूही, सिमरन हों या नेहा और सुनीता हों या हो शबाना और शमा, ये सभी छात्राएं हर रोज आस-पास की बच्चियों के लिए टीचर की भूमिका में होती हैं. ये सभी इंटर और दसवीं की छात्राएं अपने आस-पड़ोस की बच्चियों को पढ़ाती हैं.
मुजफ्फरपुर जिले के करीब 24 गांवों में बच्चियों की सजती है हर रोज किशोरी मंडल पाठशाला (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुजफ्फरपुर. कोविड-19 के महामारी के कारण करीब एक साल से ज्यादा समय से देश में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद पड़े हैं. कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए अभी इनके खुलने के आसार भी नजर नहीं आ रहें हैं. लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटियों ने कोविड और बंद स्कूलों के बीच पढ़ने का एक नया तरीका खोज निकाला है. जूही, सिमरन हों या नेहा और सुनीता हों या हो शबाना और शमा. ये सभी छात्राएं हर रोज आस पास की बच्चियों के लिए टीचर की भूमिका में होती हैं. ये सभी इंटर और दसवीं की छात्राएं अपने पास-पड़ोस की बच्चियों के लिए कक्षाएं लगाती और उन्हें पढ़ाती है.

जलालपुर गांव की इंटर में पढ़ने वाली जूही, सिमरन, दसवीं में पढ़ने वाली नेहा और सुनीता व महिनाथपुर की शबाना और शमा हर रोज तीन से साढ़े तीन घंटे के लिए ये सभी बेटियां छात्र के बजाए टीचर बन जाती हैं. अपने आस-पड़ोस छठी से लेकर नौवीं तक में पढ़ने वाली बच्चियों के लिए किसी गांव में बगीचे में या कहीं एक खुले बड़े बरामदे में किशोरी मंडल की पाठशाला लगती है. लॉकडाउन के कारण इन बच्चियों के चौपट हो रही पढ़ाई को फिर से एक जैसे नया जीवन मिल गया.

मुजफ्फरपुर जिले के करीब 24 गांवों में बच्चियों की यह किशोरी मंडल पाठशाला हर रोज सजती है. इस पाठशाला के शुरुआत में कक्षा छठी से लेकर ग्रेजुएशन तक की कक्षा के लिए बच्चियों ने ग्रुप बनाया था. 2020, में लॉकडाउन के कारण लंबे समय से बंद स्कूलों को देखते हुए इस ग्रुप में शामिल बेटियों ने अपने से कम कक्षा में पढ़ने वाली बच्चियों पढ़ाने का भार उठाया था. जो अभी भी बदस्तूर जारी है.

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