मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: दिल्ली HC ने आरोपी बृजेश की अपील पर सुनवाई टाली

Smart News Team, Last updated: 04/12/2020 04:29 PM IST
मुजफ्फरपुर बालिका गृह पर आरोपियों की सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने तारीख अगले साल के फरवरी माह निर्धारित कर दी है. जिसमें आरोपी ठाकुर ने निचली अदालत को चुनौती दी थी.
मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड का मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर है

नई दिल्ली: मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में बालिकाओं से यौन शोषण के आरोप में उम्रकैद काट रहे बृजेश ठाकुर और अन्य की सुनवाई को जस्टिस विपिन सांघी और रजनीश भटनागर की पीठ ने 18 फरवरी 2021 तक टाल दिया है. तारीख बढ़ने के कारण शुक्रवार को इस केस की सुनवाई नहीं हुई. बता दें की शुक्रवार की तारीख में दोषी अपना पक्ष रखने की मांग कर रहे थे. लेकिन, जज ने उनकी एक नहीं सुनी और सुनवाई को अगले साल की फरवरी माह की तारीख निर्धारित कर दी है.

मामले में मुख्य आरोपी और सजायाफ्ता बृजेश ठाकुर ने निचली कोर्ट के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. इसके अलावा इस केस में कुछ और आरोपितों ने भी फैसले को कोर्ट में चुनौती दे रखी है. वहीं, ठाकुर ने अपील में कहा है कि कोर्ट ने उसका पक्ष सुने बगैर जल्दबाजी में निर्णय दिया था. 

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इसके अलावा कोर्ट द्वारा जुर्माने की सजा पर भी रोक लगाने की मांग की थी. साथ ही ठाकुर के वकील ने निचली कोर्ट द्वारा 20 जनवरी, 2020 को दोषी ठहराने और 11 फरवरी को सजा सुनाने के फैसले को खारिज करने की मांग की.

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बालिका आश्रय गृह का यह केस जब दिल्ली के साकेत नगर स्थित कोर्ट में पहुंचा था. तब कोर्ट ने बिना देरी के सुनवाई करते हुए 40 से अधिक लड़कियों के यौन उत्पीड़न मामले में बृजेश ठाकुर को दोषी मानते हुए पूरी जिंदगी के लिए जेल में रहने की सजा सुनाई थी. इसके साथ ही 32.20 लाख का जुर्माना भी लगाया था. 

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मामला तब सामने आया था जब मुंबई बेस्ड टाटा इंस्टीट्ययूट ऑफ सोशल साइंस ने बिहार में संचालित आश्रय गृहों का ऑडिट कर दिया था. जिसमें मुजफ्फरपुर के अंतर्गत आने वाले आश्रय गृह में पता चला कि रह रहीं नाबालिग लड़कियों के साथ बृजेश ठाकुर ने उनका यौन शोषण किया है. टीआईएसएस ने अप्रैल 2018 में अपनी रिपोर्ट जमा की थी. बालाकिओं की जब मेडिकल रिपोर्ट आई तो पाया गया कि 42 लड़कियों में 34 लड़कियां शोषण की शिकार हुईं.

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