मुजफ्फरपुर फर्जी डकैती-अपहरण कांड में लोगों के खिलाफ FIR पर वकीलों ने उठाए सवाल

Smart News Team, Last updated: Wed, 23rd Sep 2020, 12:30 AM IST
  • मुजफ्फरपुर के दीघरा के फर्जी लूट व अपहरण कांड को लेकर हुए बवाल में शामिल लोगों पर केस दर्ज होने पर अधिवक्ता और आंदोलनकारियों ने सवाल उठाए हैं.
दिघरा कांड में जांच में जुटी पुलिस

मुजफ्फरपुर: बीते दिनों दिघरा में हुई  कथित लूट और डकैती के मामले में  घटना के बाद आंदोलन करने वाले लोगों पर एफआईआर दर्ज किए जाने पर कई अधिवक्ताओं ने सवाल उठाये है.इस संबंध में अधिवक्ताओं व आंदोलनकारियों ने मंगलवार को कोर्ट परिसर में बैठक  भी की.

जानकारी के मुताबिक कथित लूट और नाबालिक छात्रा के अपहरण के मामले में हुए प्रदर्शन के मामलें मे पुलिस ने कल कांग्रेस और जाट नेता समेत 54 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की. जिसके विरोध में मंगलवार को अधिवक्ताओं व आंदोलनकारियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया. इस मौके पर जनहित मंच के सचिव अधिवक्ता सुशील कुमार सिंह और कमलेश कुमार ने कहा कि घटना के 17 दिनों बाद एफआईआर दर्ज करायी गई. यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. जानबूझ कर एफआईआर में गैर जमानतीय धारा 332 व 353 को शामिल किया गया. जबकि इस धारा से जुड़ी घटना ही नहीं है.

फेक लूट- किडनैपिंग केस में दीघरा सड़क जाम को लेकर कांग्रेस नेता समेत 54 पर FIR

इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने एफआईआर में नामजद किए गए लोगों पर सरकारी अधिकारों के जाने का भय दिखाकर सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया है. अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सड़क जाम में शामिल कुछ लोगों को राजनीति कारणों से बचाने की कोशिश की गई है और उनका नाम एफआईआर में नहीं शामिल किया गया है. वहीं कांग्रेस नेता धर्मवीर शुक्ला व मुक्तेश्वर सिंह मुकेश को गलत तरीके से फंसाया गया है. दोनों ने मदद से लिए अधिवक्ताओं से गुहार लगायी. मौके पर वक्ताओं ने जिला प्रशासन से एफआईआर वापस लेने की मांग की है. मौके पर अरविंद कुमार सिंह, प्रेम कुमार पंकज, रणवीर कुमार, अशोक कुमार व रामभजन प्रसाद राय समेत कई अधिवक्ता व आदि लोग थे.

 

 

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