मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: दिल्ली HC में टली बृजेश ठाकुर व अन्य पर सुनवाई

Smart News Team, Last updated: 17/10/2020 07:25 AM IST
  • बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड मामले में मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर व अन्य दोषियों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई को 6 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया है. 
मुजफ्फपुर बालिका गृहकांड में आरोपी बृजेश ठाकुर

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृहकांड में मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर और अन्य दोषियों अपील पर दिल्ली उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई 6 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया.  बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में रहने वाली बच्चियों से यौन शोषण करने के जुर्म में बृजेश ठाकुर व अन्य दोषी उम्रकैद की सजा काट रहे. इससे पहले, सीबीआई ने मामले की स्थिति को लेकर संक्षिप्त विवरण पेश किया.

जानकारी के मुताबिक दोषी बृजेश ठाकुर ने अपील में निचली अदालत द्वारा मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है. निचली अदालत ने ठाकुर पर 32.20 लाख रुपये के जुर्माना भी किया है. ठाकुर ने अपील में जुर्माने की सजा पर भी रोक लगाने की मांग की है. इसके अलावा दोषी कुमार ने भी निचली अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने को चुनौती दी है. दोषी ठाकुर ने अपील में कहा है कि निचली अदालत ने उसका पक्ष सुने बिना ही जल्दबाजी में फैसला सुनाया है. जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर के समक्ष ठाकुर ने यह दलील देते हुए निचली अदालत द्वारा 20 जनवरी, 2020 को दोषी ठहराने और 11 फरवरी को सजा सुनाने के फैसले को रद्द करने की मांग की है. पिछली सुनवाई पर सीबीआई ने पीठ को बताया था कि ठाकुर को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई गई है.

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गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर में मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) ने पूरे बिहार में स्थित आश्रयगृहों का सोशल ऑडिट किया था. इसमें कहा गया था कि बृजेश ठाकुर द्वारा संचालित आश्रयगृह में नाबालिग लड़कियों के साथ लगातार यौन शोषण किया जाता है. ऑडिट के बाद टीआईएसएस ने अप्रैल 2018 में अपनी रिपोर्ट जमा की थी. इसकी समीक्षा के बाद सरकार ने 31 मई, 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

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 मामला सामने आने के बाद लड़कियों को आश्रयगृह से मधुबनी, पटना और मोकामा में स्थित आश्रय गृह में स्थानांतरित कर दिया गया. बाद में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के मेडिकल बोर्ड ने बालिका गृह की अधिकांश लड़कियों के साथ यौन शोषण होने की पुष्टि की. बालिका गृह में मौजूद 42 लड़कियों में से 34 लड़कियों के शोषण की पुष्टि हुई.

 

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