मुजफ्फरपुर: बांग्लादेश की जेल से रिहा होकर पांच साल बाद गांव पहुंचा व्यक्ति, परिवार में खुशी का माहौल

Haimendra Singh, Last updated: Tue, 21st Sep 2021, 12:50 PM IST
  • मुजफ्फरपुर के बरियारपुर ओपी क्षेत्र के महमदपुर बनबारी गांव निवासी रामसुंदर सिंह 2016 में बंगाल में काम करते थे. एक दिन रास्ता भटकने के कारण वह बांग्लादेश की सीमा में घूस गए. जहां बांग्लादेश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. पूरे पांच साल रामसुंदर वहां की जेल से रिहा हुए है.
बांग्लादेश की जेल से रिहा होकर पांच साल बाद गांव लौटे रामसुंदर पासवान.

मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक गांव में इस समय खुशी का माहौल है. बरियारपुर ओपी क्षेत्र के महमदपुर बनबारी गांव के रहने वाले 60 वर्षीय राम सुंदर पासवान पूरे पांच सालों बाद बांग्लादेश की जेल से रिहा होकर अपने गांव आए है. राम सुंदर का हालचाल जानने के लिए गांव वाले और उनके रिश्तेदार मिलने के लिए गांव पहुंच रहे है. राम सुंदर ने बताया कि वर्ष 2016 में बंगाल में काम करते थे. एक दिन रास्ता भटक कर बांग्लादेश सीमा में पहुंच गए , जिसके बाद बग्लादेश की पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया. बता दें कि कुछ दिनों पहले बांग्लादेश सरकार ने जेल में बद कुछ बंदियों को छोड़ने का फैसला किया था.

बांग्लादेश सरकार ने कुछ दिनों पहले राम सुंदर पासवान के अलावा कुछ ओर बंदियों अपनी जेलों से रिहा करके पश्चिम बंगाल सरकार के हवाले कर दिया था. बगाल पुलिस के राम सुंदर के रिहा होने की सूचना उनके परिवार को दी. परिवार के सदस्य उन्हें लेने के लिए पं. बंगाल पहुंचे. इंग्लिश पुलिस स्टेशन ने रामसुंदर को उसके भाई बालेश्वर पासवान के हवाले कर दिया. रामसुंदर के भाई बालेश्वर पासवान ने बताया कि सरकार, पुलिस व प्रसाशन ने कई बार बंगलादेश जेल में बन्द राम सुंदर पासवान के चरित्र का सत्यपन कराया. लम्बे इंतजार के बाद उन्हें रिहा किया गया है. भाई बालेश्वर ने कहा, कि राम सुंदर पासवान की मानसिक स्थिति भी थोड़ी खराब है.

बांग्लादेश की जेल से रिहा होकर पांच साल बाद गांव पहुंचा व्यक्ति

परिवार में है खुशी का माहौल

बांग्लादेश सरकार के द्वारा रामसुंदर के रिहा करने की सूचना मिलने बाद से उनके परिवार में खुशी का माहौल है. गांव पहुंचने के बाद गांव, परिवार और रिश्तेदारी के लोग उनसे मिलने के लिए रामसुंदर के घर पहुंचने लगे है. हर कोई सिर्फ जानना चाहता है कि कैसे वह बांग्लादेश पहुंच गए थे.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें