हृदयस्थली ऐसे बना था महात्मा गांधी का दूसरा घर, तोड़ने जाने को लेकर उठा बवाल

Deepakshi Sharma, Last updated: Wed, 27th Oct 2021, 8:45 PM IST
  • बिहार के मुजफ्फरपुर में मौजूद हृदयस्थली को महात्मा गांधी के दूसरे घर के तौर पर जाना जाता है, जिसे अब जल्द ही तोड़कर शॉपिंग मॉल बनाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन स्वतंत्रता सेनानी पंडित मधुसूदन झा ने सीएम नीतीश कुमार को आवेदन भेजा. साथ ही नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय की इस हरकत पर अविलंब रोक लगाने की मांग भी की है.
हृदयस्थली को तोड़कर मॉल बनाने की तैयारी 

मुजफ्फरपुर. देश में अलग-अलग स्तर पर विकास हो रहा है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जिन चीजों ने इतिहास में अहम भूमिका निभाई है उन्हें भविष्य सुधारने के चक्कर में पूरी तरह से नष्ट कर दें. ऐसा ही कुछ बिहार के मुजफ्फरपुर में देखने को मिला है. आजादी के आंदोलन में हृदयस्थली का खास योगदान रहा है. अब बापू की हृदयस्थली को तोड़कर शॉपिंग मॉल बनाए जाने की तैयारी है. मुजफ्फरपुर जिले के तिलक मैदान रोड़ पर मौजूद हृदयस्थली से महात्मा गांधी का गहरा नाता रहा है.1934 में जिस वक्त भूकंप के चलते मुजफ्फरपुर में सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे. तब गांधी जी के नेतृत्व में ही देश के कई बड़े नेता आम लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए मुजफ्फरपुर आए थे और वहां राहत शिविर भी चलाए गए थे.

हृदयस्थली में भूंकप पीड़ितों की सेवा का काम शहर और गांव में चलाया गया था. पीड़ित मानवता की सेवा के लिए महात्मा गांधी के दूसरे घर के तौर पर इसे लोग जाना करते हैं. उस वक्त बापू ने यहीं पर कहा था कि मुजफ्फरपुर मेरे लिए हृदयस्थली है. तभी से ही इसका नाम हृदयस्थली रख दिया गया था. खुद 23 अप्रैल 1934 को महात्मा गांधी ने इसका उद्धाटन किया था.

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इतना ही नहीं शफी मंजिल के सामने विदेशी वस्त्र की होलिका जलाई गई थी. जहां पर अभी हृदयस्थली मौजूद है. इतिहास में अहम भूमिका निभाने वाले हृदयस्थली को तोड़े जाने को लेकर शहर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इस वक्त गुस्से में हैं. इसी के चलते स्वतंत्रता सेनानी पंडित मधुसूदन झा ने सीएम नीतीश कुमार को आवेदन भेजा. साथ ही नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय की इस हरकत पर अविलंब रोक लगाने की मांग भी की है.

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ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मांग नीतीश कुमार से करते हुए उन्होंने कहा कि यहां पर भूकंप राहत शिविर चलाने वाले सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और अमर शहीदों के नाम का शिलापट्ट गवाह और सबूत के तौर पर लगा हुआ था उसे भी तोड़ दिया गया है. ऐसे में इसे बचाने की मांग उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से की है.

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