बिहार सरकार पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, 15 हाईकोर्ट जज रोज शराबबंदी केस में जमानत सुनते हैं

Somya Sri, Last updated: Wed, 12th Jan 2022, 1:21 PM IST
  • देश के सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार सरकार को फटकार लगाई है. राज्य में लागू शरबबन्दी आरोपियों की जमानत खारिज कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची बिहार सरकार को चीफ जस्टिस एन वी रमण ने कड़ी फटकार लगाते हुए एक साथ 40 अपीलें खारिज कर दी है. चीफ जस्टिस ने कहा कि पटना हाईकोर्ट के 14-15 जज हर दिन इन जमानत के मामलों को सुन रहे हैं. इन केसों ने अदालतों का दम घोट रखा है.
बिहार के सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

मुजफ्फरपुर: बिहार में लागू शराबबंदी कानून के उल्लंघन मामलों की सुनवाई करने के दौरान चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना ने बिहार की नीतीश कुमार की सरकार पर भड़क गई. शरबबन्दी के आरोपियों की जमानत खारिज कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची बिहार सरकार को चीफ जस्टिस एन वी रमण ने कड़ी फटकार लगाते हुए एक साथ 40 अपीलें खारिज कर दी है. चीफ जस्टिस ने कहा है कि "इन केसों (शराबबंदी केस) ने अदालतों का दम घोट रखा है, बिहार की सभी अदालतें शराबबंदी मामलों से ही घिरी हैं. इसकी वजह से किसी मामले पर सुनवाई नहीं हो पा रही.

सीजेआई ने आगे कहा कि, " मुझे बताया गया कि पटना हाईकोर्ट के 14-15 जज हर दिन इन जमानत के मामलों को सुन रहे हैं. आप जानते हैं कि शराबबंदी कानून ने पटना हाईकोर्ट के कामकाज को कितना प्रभावित किया है? अब वह अदालत किसी मामले को लिस्ट करने में 1 साल का समय ले रही है."

नीतीश सरकार को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, शराबबंदी ने अदालतों का दम घोंट रखा

बिहार सरकार की ओर से अधिवक्ता ने क्या कहा?

जानकारी के मुताबिक बिहार सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि, "400 से 500 लीटर शराब ले जाते या बेचते पाए गए हैं और फिर भी उन्हें यांत्रिक तरीके से जमानत दी गई है, जबकि वे चार-पांच महीने ही जेल में रहे हैं." कुमार ने कहा, "मेरी समस्या यह है कि शराब के मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा लगातार जेल में बिताई गई कुछ अवधि के आधार पर ही जमानत के आदेश पारित किए जा रहे हैं."

शरबबन्दी मामलों में अब याचिकाओं से निपटना उचित नहीं -सीजेआई

इसपर प्रधान न्यायाधीश ने हत्या पर भारतीय दंड संहिता के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि जमानत और कभी-कभी, इन मामलों में अदालतों द्वारा अग्रिम जमानत भी दी जाती है. पीठ ने कहा कि, "बिहार सरकार जिस अपराध के बारे में बता रही है कि लोगों से करीब 800, 200 या 300 लीटर शराब जब्त की गई है, कुछ मामलों में 2017 में जमानत दी गई थी इसलिए अब इसके लिए याचिकाओं से निपटना उचित नहीं होगा."

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साल 2021 में 66 हजार से अधिक शराबबंदी उल्लंघन के मामले

मालूम हो कि हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसके मुताबिक पिछले साल 2021 में 66 हजार 258 मामले शराबबंदी कानून के उल्लंघन के खिलाफ दर्ज किए गए थे. जिसमें सबसे ज्यादा गिरफ्तारी पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में हुए हैं वहीं पिछले एक साल में 45 लाख 37 हजार 81 लीटर शराब बरामद हुई है. बिहार राज्य के वैशाली, पटना औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, मधुबनी में सबसे ज्यादा शराब बरामद हुए हैं. जिसमें 29 लाख लीटर शराब विदेशी है जबकि 15 लाख देसी शराब बरामद हुए थे.

वहीं पुलिस मुख्यालय के मुताबिक साल 2021 में शराबबंदी कानून के उल्लंघन करने के मामले में 30 पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी. जानकारी के मुताबिक पिछले 1 साल में 30 पुलिसकर्मियों को इस संबंध में बर्खास्त किया गया. इसके अलावा 45 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. जबकि 17 थानाध्यक्षों को उनके पद से निष्कासित कर दिया गया.

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