Chhath Puja 2021: भोर अर्घ्य के बाद संपन्न होता है महापर्व छठ, जानें कब की जाएगी उगते सूर्य की पूजा

Pallawi Kumari, Last updated: Sun, 31st Oct 2021, 3:15 PM IST
  • लोक आस्था के महापर्व छठ 2021 की शुरुआत 8 नवंबर से हो रही है. चार दिनों  तक चलने वाले इस पर्व का आखिरी दिन भोर का अर्घ्य होता है. भोर का अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत खोलती है. आइये जानते है 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य को  कब अर्घ्य दिया जाएगा. 
उगले सूर्य भोर का अर्घ्य देने का समय.

दीपावली के छह दिन बाद छठ पूजा मनाया जाता है. छठ पूजा कार्तिक मास के षष्ठी तिथि से होता है. चार दिनों तक चलने वाले इस त्योहार की शुरुआत नहाय खास से होती है और भोर या उषा अर्घ्य के साथ समाप्त होती है. व्रती इस दौरान 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती है और पूरे विधि विधान के साथ छठ मईया की पूजा अराधना करती है. वैसे तो छठ पूजा विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में मनाया जाता है. लेकिन आज अब यह त्योहार काफी प्रचलित हो गया है. इसलिए इसे हर क्षेत्र में मनाया जाने लगा है.

छठ पूजा में चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा करने के बाद इसका समापन होता है. छठ के चौथे दिन सुबह सूर्योदय होने से पहले व्रती, घर और आस पड़ोस के लोग नदी, घाट या तालाब जाते हैं. पहले छठी मईया और सूर्य देव की उपासना की जाती है और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसे भोर का अर्घ्य या उषा अर्घ्य भी कहा जाता है. इस बार 11 नवंबर को छठ पर्व का दूसरा सूर्य अर्घ्य यानी भोर का अर्घ्य दिया जाएगा. आइये जानते हैं अगते सूर्य को अर्घ्य देने का मुहूर्त और पूजा विधि.

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उषा अर्घ्य या भोर अर्घ्य का शुभ मुहूर्त:

11 नवंबर को छठ पूजा के चौथे दिन सूर्योदय अर्घ्य तथा पारण होगा.

11 नवंबर 2021 (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय :सुबह 6 बजकर 40 मिनट

उषा अर्घ्य का महत्व: छठ पूजा के चौथे व आखिरी दिन व्रती सूर्यदेव को अर्घ्य देती है. नदी या तालाब के घाट पर जाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है इसके बाद व्रती पारण करती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महापर्व छठ के अंतिम दिन सूर्य की पत्नी उषा को अर्घ्य दिया जाता है. इससे जीवन में तेज बना रहता है और व्रत करने वाले जातकों की मनोकामना पूरी होती है.

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