मुजफ्फरपुर: पूर्व सैनिकों में सीएसडी कैंटीन बंद होने से नाराजगी, सड़क पर उतरेंगे

Smart News Team, Last updated: 16/12/2020 03:35 PM IST
  • पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष और संयोजक की ओर से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर की गई है सीएसडी कैंटीन यहां स्थापित करने की मांग की जा रही है. जल्द ही फौजी आंदोलन की रुपरेखा तैयार कर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं.
फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर. सेना के स्टेशन हेडक्वार्टर की सीएसडी कैंटीन बंद होने से पूर्व व वर्तमान सैनिक एवं उनके स्वजनों में नाराजगी पाई जा रही है. पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष का कहना है कि वर्तमान केंद्र सरकार में फैजियों का सबसे अधिक शोषण हो रह है. पूरी जिंदगी सीमा पर लड़ने वालों के लिए रियायती दर पर मिलने वाला सामान भी अब उत्तर बिहार के 50 हजार फौजियों को नहीं मिल पा रहा है. गौर हो कि पूर्व सैनिकों के संगठन द्वारा सीएसडी कैंटीन यहां स्थापित करने की लगातार कोशिश की जा रही है. इसके लिए पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष राम प्रवेश सिंह, संयोजक मनोज कुमार सिंह ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री से लेकर सेना के तीनों अध्यक्षों को पत्र भेजा है लेकिन सुनवाई नहीं होने से उनमें निराशा है. 

पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष राम प्रवेश सिंह का कहना है कि वर्तमान केंद्र सरकार ने फैजियों तथा उनके स्वजनों को बैकफुट पर लाकर रख दिया है. सीएसडी बंद होने से अब उन्हें रोजाना जरूरत का सामान महंगे दामों में बाजार से खरीदारी करनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि सीएसडी कैंटीन वापस करने के लिए पूर्व सैनिक अभी हिम्मत नहीं हारे हैं. आंदोलन की रूप-रेखा तैयार की जा रही है. शीघ्र ही फौजी सड़क पर उतरने की तैयारी की जा रही है.

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उन्होंने कहा कि, पिछले साल सेना के लिए लाए गए वन रैंक, वन पेंशन (ओआरओपी) योजना भी विफल साबित हुई. ओआरओपी सेना के जवानों के लिए होना चाहिए, लेकिन इसमें सेना के वरीय अधिकारियों को जोड़ दिया गया. इसके कारण फौजियों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ भी नहीं मिला. उन्होंने कहा कि पूरी जिंदगी देश के लिए जान न्योछावर करने वालों को अपने ही घर में लड़ना पड़ रहा है। एक सीएसडी कैंटीन के लिए पीएम से लेकर सीएम तक गुहार लगानी पड़ रही है. कैंटीन बंद होने से पूर्व सैनिकों का सीएसडी कैंटीन का कार्ड भी रिन्यूवल नहीं हो रहा. स्टेशन हेडक्वार्टर के बदले एनसीसी कार्यालय में कार्ड रिन्यूवल के लिए जमा करने को कहा जा रहा है. 

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