त्रिदेवों से मां सरस्वती को मिले 12 नाम, 11 बार जप करने से मिलेगा विद्या का वरदान

Pallawi Kumari, Last updated: Tue, 25th Jan 2022, 9:39 AM IST
  • बसंत पूजा पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है. इस साल 2022 सरस्वती पूजा 5 फरवरी को है. मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान में वृद्धि होती है और बुद्धि विकास का आशीर्वाद मिलता है. कहा जाता है कि त्रिदेवों ने ही मां सरस्वती की उत्पति की और उन्हें कई नाम दिए.  
मां सरस्वती (फोटो-लाइव हिन्दुस्तान)

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बंसत पंचमी मनाई जाती है. ये दिन मां सरस्वती की पूजा के लिए जाना जाता है. मां सरस्वती विद्या और ज्ञान की देवी कहलाती है. लेकिन बसंत पंचमी के दिन किसी शुभ कार्य की शुरुआत करना भी शुभ माना गया है. क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती की उत्पति हुई थी. नीरस और बेरंग संसार में खुशहाली और रौनक के लिए बह्मा जी के आशीर्वाद से त्रिदेवों ने मां सरस्वती की उत्पत्ति की. इसके बाद उन्होंने मां को कई नाम भी दिए. आइये जानते हैं मां के नामों और उनके महत्व के बारे में.

मां सरस्वती के वैसे तो कई नाम हैं. लेकिन त्रिदेवों से उन्हें 12 नाम मिले. हर नाम का अपना अलग महत्व होता है. कहा जाता है कि अगर आप सरस्वती मां के मंत्र, श्लोक, वंदना , आरती आदि नहीं जानते तो इन 12 नामों का जप करने से भी मां प्रसन्न होती है. देवी सरस्वती के 12 नामों का जप करना भी पर्याप्त होता है. इससे आफको परीक्षा और नौकरी में सफलता, यश की प्राप्ति, विद्या का ज्ञान और बुद्धि मिलती है.

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त्रिदेवों से मिले देवी सरस्वती को ये 12 नाम-

मां शारदे, मां वीणापाणि, वीणावादनी, मां बागेश्वरी, मां भगवती, मां वाग्यदेवी, हंसवाहिनी, ब्रह्माचारिणी, मां बुद्धिगात्री, मां भुवनेश्वरी, वागीश्वरी और चंद्रकाति.

बसंत पचंमी के दिन हुई मां सरस्वती की उत्पत्ति-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की और संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ था. लेकिन उनमें किसी तरह की हलचल और रौनक नहीं थी. इसलिए ब्रह्मा जी को किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी. फिर उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं. उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी. तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था. यह देवी सरस्वती थीं. मां सरस्वती ने जब वीणा बजाई तो संसार की हर चीज में स्वर आ गया और जीव, जंतु, नदी, झरने सभी में हलचल होने लगी. ये दिन था बसंत पंचमी का. तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी के दिन होने लगी.

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