मुजफ्फरपुर: शहीद खुदीराम बोस को DM ने दी श्रद्धाजंलि, पुलिस बल की सलामी

Smart News Team, Last updated: 11/08/2020 03:46 PM IST
  • मुजफ्फरपुर डीएम ने शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि दी. कंपनी बाग में पुलिस बल ने अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने वाले शहीद को सलामी दी.
शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर मुजफ्फरपुर डीएम ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.

मुजफ्फरपुर के कंपनी बाग स्थित शहीद खुदीराम स्मारक स्थल पर डीएम चंद्रशेखर सिंह ने शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. मंगलवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और मुजफ्फरपुर पुलिस बल ने शहीद खुदीराम को सलामी दी. खुदीराम बोस ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लिया था.

मुजफ्फरपुर का कंपनीबाग बंगाल के मेदनापुर के 16 वर्षीय बालक शहीद खुदीराम बोस की वीरता का साक्षी रहा है. 11 अगस्त 1908 को क्रांतिकारी खुदीराम बोस को फांसी के तख्ते पर लटका दिया गया था. देश के लिए शहीद होने वाले खुदीराम को मुजफ्फरपुर समेत पूरे देश ने श्रद्धांजलि अर्पित की है. 

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अप्रैल 1908 को खुदीराम बोस ने मुजफ्फरपुर के ब्रिटिश क्लब के मुख्य द्वार पर ब्रिटिश मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को मारने के लिए उनकी बग्घी पर बम फेंका था. अंग्रेजी हुकूमत ने खुदीराम को इसके लिए फांसी की सजा दी थी. खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर में ही फांसी दी गई थी. 

शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर मुजफ्फरपुर पुलिस ने सलामी दी.

खुदीराम इतने साहसी थे कि गीता को हाथ में लेकर खुशी-खुशी फांसी चढ़ गए थे. इसके बाद खुदीराम की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि बंगाल के कई नौजवान बड़े गर्व से आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे. 

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ब्रिटिश क्लब के जिस दरवाजे पर ब्रिटिश मजिस्ट्रेट पर हमला हुआ था उसे बंद कर दिया गया था और क्लब में जाने के दूसरा दरवाजा बना दिया गया था. आज मुजफ्फरनगर के इस ऐतिहासिक स्थल के गेट पर कूड़े का ढ़ेर लगा रहता है. प्रशासन ने आजतक इसकी कोई सुध नहीं ली है.

 

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