क्या है खरमास, क्यों एक महीने तक रुक जाते हैं शुभ काम, सभी सवालों के जवाब इस पौराणिक कथा में

Pallawi Kumari, Last updated: Tue, 14th Dec 2021, 2:25 PM IST
  • हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल मार्गशीर्ष और पौष माह के बीच में खरमास लगता है. खरमास में पूरे एक साल शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इसका कारण खरमास की पौराणिक कथा में बताई गई.
खरमास की पौराणिक कथा

हर साल मार्गशीर्ष और पौष माह के बीच में खरमास लगता है. इस बार 16 दिसंबर से खरमास लग रहा है, जो 14 जनवरी 2022 मकर संक्रांति के बाद समाप्त होगा. खरमास में पूरे एक माह शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ व मांगलिक कार्य करने पर विराम लग जाता है. लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल होता है आखिर खरमास क्या है, क्यों इस दौरान नहीं होते हैं शुभ काम. अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो खरमास की इस पौराणिक कथा में सारे सवालों के जवाब मिलेंगे.

क्या है खरमास:

सौर पौष मास का समय खरमास कहलाता है. खरमास को कई जगहों पर मलमास भी कहा जाता है. खरमास के खर का मतलब 'दुष्ट' और मास का मतलब 'महीना' होता है. जब सूर्य, बृहस्पति की राशि धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करते हैं तब से ही खरमास आरंभ होता है. हिंदू धर्म में खरमास का महीना शुभ नहीं माना जाता. इसलिए इस दौरान शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.

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खरमास या मलमास के दौरान मांगलिक कार्य जैसे शादी, सगाई, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं होते. साथ ही न्या घर खरीदना, नया व्यापार शुरु करना या वाहन खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता.

खरमास पौराणिक कथा:

भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं. सूर्यदेव को कहीं भी रुकने की इजाजत नहीं होती. लेकिन रथ में उनके सात घोड़े लगातार चलने और आराम न मिलने के कारण थक जाते हैं. घोड़ों की ऐसी हालत देख भगवान सूर्य का मन नहीं मानता और वह घोड़ों को तालाब किनारे ले जाते हैं. लेकिन तभी सूर्य देव को आभास होता है कि अगर रथ रुक गया तो अनर्थ हो जाएगा. तालाब किनारे पहुंचते ही उन्होंने देखा कि दो खर यानी गधे वहां पहले से मौजूद थे. भगवान सूर्यदेव ने घोड़ों के पानी पीने और आराम देने के लिए तालाब के पास छोड़ दिया और गधों को रथ में जोड़ दिया. लेकिन वो घोड़े की तरह रथ नहीं खींच पाए और रथ की रफ्तार धीमी पड़ गई. जैसे तैसे गधों के साथ ही सूर्यदेव के रथ में एक महीने तक का चक्र पूरा किया. इस बीच जब घोड़ों को आराम मिल गया तो फिर से सूर्य देव के रथ में तेजी आ गई और रथ अपनी गति में वापस लौट आया. इसलिए हर साल ये क्रम चलता रहता है और हर साल एक महीने के लिए खरमास लगता है.

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