आज है जन्माष्टमी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम

Anuradha Raj, Last updated: Mon, 30th Aug 2021, 7:44 AM IST
  • 30 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. ऐसे में क्या शुभ मुहूर्त है, या किया पूजा विधि है और पूजा के क्या नियम है इसके बारे में जानना बेहद ही जरूरी है. हिंदू धर्म में जन्माष्टमी को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है.
आज है जन्माष्टमी 

भाद्रमास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था.  इसलिए हर साल इस दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है. देश से लेकर विदेश तक इस पर्व की बहुत ही ज्यादा धूम देखने को मिलती है. इस दिन विधि-विधान से श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा अर्चना होती है, और लोग व्रत भी रखते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो लोग व्रत रखते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं सुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम…

 ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

11 बजकर 59 मिनट से 30 अगस्त को देर रात 12 बजक 44 मिनट तक

पूजा की कुल अवधि

45 मिनट

इस व्रत का पारण रोहिणी नक्षत्र के समापन के बाद ही किया जाता है.

ये है जन्माष्टमी का पारण मुहूर्त

कृष्ण के जन्म के बाद उनकी विधि-विधान से पूजा करने के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर पारण करते हैं. वैसे अगले दिन भी कई लोग पारण करते हैं.

ये है पारण का समय 

सुबह 9 बजकर 44 मिनट के बाद 31 अगस्त को पारण कर सकते हैं.

ये है पूजा विधि

सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि कर घर के मंदिर की सफाई करें. उसके बाद मंदिर में दीप जलाएं. मंदिर में जितने भी देवी देवता हैं उनका जलाभिषेक करें. जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल की पूजा होती है. लड्डू गोपाल का भी जलाभिषेक करें. लड्डू गोपाल को इस दिन झूले में बैठाएं. भोग में लड्डू गोपाल को केवल सात्विक चीजे ही दें. पुत्र की तरह ही लड्डू गोपाल की सेवा करें.  रात्रि पूजा का इस दिन बहुत ही ज्यादा महत्व होता है, क्योंकि श्री कृष्ण का जन्म रात्रि में ही हुआ था. भगवान  श्री कृष्ण की रात्रि में विशेष प्रकार से पूजा करनी चाहिए. मिश्री, मेवा का भोग लड्डू गोपाल को लगाएं. आरती करें लड्डू गोपाल की. लड्डू गोपाल का इस दिन ज्यादा से ज्यादा ध्यान दें. जितना हो सके इस दिन लड्डू गोपाल की सेवा करें.

जन्माष्टमी पर नियमों का करें पालन

भगवान श्री कृष्ण की पूजा के साथ इस पावन दिन पर गाय की भी पूजा करें. पूजा के स्थान पर गाय की मूर्ती भी रखें. सुंदर और साफ आसन पर बैठ पूजा करनी चाहिए. गंगा जल से भगवान श्री कृष्ण का अभिषेक करें. इतना ही नहीं गाय के घी का ही इस्तेमाल करें.

 

 

 

 

 

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