Lunar Eclipse: क्या होता है सूतक ? चंद्र ग्रहण में क्या है इसकी पाबंदियां और प्रभाव

Pallawi Kumari, Last updated: Fri, 19th Nov 2021, 3:37 PM IST
  • शुक्रवार 19 नवंबर को लगे चंद्र ग्रहण का भारत में उपच्छाया देखा गया. आंशिक चंद्र ग्रहण होने के कारण ज्योतिषों का कहना है कि इस ग्रहण के सूतक का प्रभाव भारत में नहीं होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूतक क्या होता है और ग्रहण के दौरान क्या होता है सूतक काल का प्रभाव. अगर नहीं तो यह खबर आपके लिए है.
ग्रहण में क्या होता है सूतक काल का प्रभाव.

आज 19 नवंबर को साल का आखिरी चंद ग्रहण लग चुका है. इस ग्रहण को सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है. हालांकि भारत में इस ग्रहण का उपच्छाया है इसलिए चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं है. सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण. दोनों परिस्थियों में ग्रहण से पहले सूतक लगता है. सूतक काल को अशुभ माना जाता है और इस दौरान शुभ कार्यों में मनाही होती है. यहां तक कि मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं.

क्या होता है सूतक काल-ज्योतिष के अनुसार चंद्र और सूर्य दोनों ग्रहण से पहले सूतक लगता है, जिसका प्रभाव ग्रहण खत्म होने तक रहता है. सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लगता है और चंद्र ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लगता है. सूतक काल की सटीक गणना के लिए यही विधि अपनाई जाती है. ग्रहण के खत्म होते ही सूतक भी खुद खत्म हो जाता है. लेकिन ग्रहण के खत्म होते ही तुरंत पूजा पाठ शुरू नहीं करना चाहिए. पहले आप भगवान के मंदिर में गंगाजल छिड़के मंदिर की साफ सफाई करें और खुद भी स्नान करें. इसके बाद ही पूजा पाठ शुरू करे.

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किस ग्रहण में नहीं लगता सूतक- वैसे तो चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण दोनों में ही सूतक काल लगता है. लेकिन चंद्र ग्रहण तीन तरह के होते हैं. पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और उपच्छाया चंद्र ग्रहण. जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चांद को पूरी तरह से ढक लेती है तब इसे पूर्ण चंद्र ग्रहणकहते हैं. इसमें चंद्रमा लाल दिखाई देता है. वहीं जब चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती है और चंद्रमा के कुछ ही भाग पर पृथ्वी की छाया पड़ पाती है, तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं. उपछाया चंद्र ग्रहण में सूर्य और चंद्र के बीच पृथ्वी उस समय आती है, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं. इसे ग्रहण नहीं बल्कि ग्रहण का उपच्छाया कहा जाता है. ऐसे ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होता है.

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