13 जनवरी को साल की पहली एकादशी, संतान के लिए रखा जाएगा पौष पुत्रदा एकदाशी व्रत

Smart News Team, Last updated: Fri, 7th Jan 2022, 5:10 PM IST
  • संतान की कामना पूर्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस बार पौष पुत्रदा एकदाशी का व्रत 13 जनवरी को है. इस दिन विष्णु भगवान की पूजा की जाती है और संतान के लिए व्रत रखा जाता है. आइये जानते हैं पुत्रदा एकदाशी का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त.
पौष पुत्रदा एकदाशी

नए साल 2022 की शुरुआत हो चुकी है. वैसे तो पूरे साल कई एकादशी पड़ती है लेकिन साल की पहली एकादशी 13 जनवरी को हैं. इस दिन पौष पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा. पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है. पहली एकादशी पौष मास में पड़ती है और दूसरी सावन मास में. पौष पुत्रदा एकादसी में पूजा और व्रत का खास महत्व होता है. संतान प्राप्ति या संतान की संकटों से रक्षा के लिए ये व्रत अति उत्तम माना जाता है.आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में.

पौष पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त व पारण का समय-

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत- 13 जनवरी 2022, गुरुवार

एकादशी तिथि प्रारम्भ - 12 जनवरी 2022 शाम 04:49 बजे

एकादशी तिथि समाप्त - 13 जनवरी 2022 शाम 07:32 बजे

पारण का समय- 14 जनवरी 2022, शुक्रवार, सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक.

पारण तिथि समाप्त- 14 जनवरी, रात 10 बजकर 19 मिनट तक

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पौष पुत्रदा एकादशी पूजा विधि-

एकादशी से एक दिन पहले 12 जनवरी को दशमी के दिन सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लें. इस दिन से ही भोजन में प्यार लहसुन न खाएं. एकादसी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें. भगवान को धूप, दीप, अक्षत, रोली, फूल, नैवेद्य चढ़ाएं और पुत्रदा एकादशी व्रत कथा पढ़ें. व्रत कथा के बाद संतान गोपाल मंत्र पढ़ें. विष्णु भगवान के साथ श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करें. श्रीकृष्ण को फल, तुलसी , पीले फूल और पंचामृत का भोग लगाएं. शाम को फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें और फिर आरती करें. इसके बाद प्रसाद ग्रहण करें. पुत्रदा एकादशी के दिन गरीबों को दान देना चाहिए.

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