Ekadashi 2022: 13 मार्च को है रंगभरी एकादशी, इन उपायों से मिलेगा शिव-पार्वती की कृपा

Pallawi Kumari, Last updated: Thu, 3rd Mar 2022, 5:35 PM IST
  • Rangbhari Ekadashi 2022: फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रंगभरी एकादशी मनाई जाती है. इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि इसी दिन माता पार्वती भगवान भोलेनाथ के साथ काशी पहुंची थीं और उनका भव्य स्वागत किया गया था. इस बार रविवार 13 मार्च को रंगभरी एकादशी पड़ रही है.
रंगभरी एकादशी (फोटो-लाइव हिन्दुस्तान)

Rangbhari Ekadashi 2022: वैसे तो हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में दो एकादशी तिथि पड़ती है. लेकिन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी या आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है. रंगभरी एकादशी होली से 5 दिन पहले मनाई जाती है. शिव भक्तों के लिए तो इसी दिन से होली की शुरुआत हो जाती है. मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के व्रत रखने और शिव पार्वती की पूजा करने से व्यक्ति से सारे पाप दूर हो जाते हैं. हर एकादशी की तरह इसमें भी स्नान, दान, पूजा और व्रत का विशेष महत्व होता है.

रंगभरी एकादशी के दिन करें ये काम

1.रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी भी कहा जाता है. कहा जाता है कि भगवान विष्णु आंवले के पेड़े में निवास करते हैं. शास्त्रों के मुताबिक आंवले के पेड़ की जड़ में भगवान विष्णु, तने में शिव जी और ऊपर हिस्से में ब्रह्मा जी तथा शाखाओं और पत्तों में अन्य देवी-देवताएं निवास करते हैं. वैसे तो एकादशी का व्रत सभी व्रतों में कठिन माना जाता है. लेकिन जो लोग व्रत नहीं कर सकते, उन्हें इस दिन आंवले का स्पर्श और सेवन जरूर करना चाहिए. इससे पुण्य की प्राप्ति होती है.

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2.रंगभरी एकादशी को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसी दिन महादेव माता पार्वती को गौना कर काशी लेकर पहुंचे थे. इसलिए काशी में भक्त इस दिन रंग गुलाल खेलते हैं. इसी दिन बाबा विश्वनाथ संग होली खेली जाती है और शोभायात्रा निकाली जाती है.

3.रंगभरी एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें. फिर माता गौरा का विशेष श्रृंगार किया जाता है. फिर शिवलिंग पर पूजा करें. इसके बाद शिव-पार्वती की साथ वाली प्रतिमा या फोटो में भी पूजा अराधना करें.

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