मुजफ्फरपुर : एईएस से बचाव की कवायद, जागरुकता व बचाव पर रहेगा विशेष फोकस

Smart News Team, Last updated: Wed, 3rd Feb 2021, 12:09 PM IST
  • एम्स पटना में पिछले साल एईएस की जद में आने वाले अधिकतर बच्चे कुपोषित पाए गए. विभाग की ओर से इस बार विशेष रणनीति बनाई गई है और कुपोषित बच्चों की पहचान कर इलाज किया जाएगा.
फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर. गर्मियों में फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. एईएस बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए विभाग की ओर से इस बार लक्षण के आधार पर इलाज किया जाएगा. एईएस बीमारी का अभी तक कोई कारण नहीं आने के कारण ही इस साल लक्षण के आधार पर इसका इलाज किया जाएगा. गत वर्ष पटना एम्स में एईएस की जद में आने वाले ज्यादातर बच्चे कुपोषण का शिकार थे.

जिला वेक्टर जनित पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार के मुताबिक एम्स पटना के रिसर्च में यह बात भी सामने आई थी कि रात को खाना खाकर ना सोने वाले बच्चों या भूखे पेट सोने वाले बच्चों की ही एईएस ने अपनी चपेट में लिया. इस बार विशेष रणनीति बनाई गई है कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनका इलाज किया जाएगा और मेडिसन दी जाएगी. इस संबंधी राज्य मुख्यालय को प्रस्ताव भेज दिया गया है.

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उन्होंने बताया कि राज्य मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद इस योजना पर काम किया जाएगा. लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें आशा वर्कर, एएनएम और आंगनबाड़ी वर्कर काम करेंगे. इस संबंधी सभी पीएचसी प्रभारियों को जानकारी भेज दी गई है कि वे अपने अस्पताल में एईएस वार्ड में बच्चों के इलाज हेतु जरूरी उपकरणों की व्यवस्था कर लें. मुख्यालय से भी दवाएं भेजी जाएंगी. उन्हें तमाम व्यवस्थाएं एक महीने में पूरी करने के लिए कहा गया है.

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