मुजफ्फरपुर: कृषि बिल के खिलाफ कांग्रेस और वामदल उतरे सड़क पर,कई जगहों पर धरना

Smart News Team, Last updated: 02/12/2020 09:33 PM IST
  • मुजफ्फरपुर शहर से लेकर गांव तक आज कृषि बिल को लेकर गहमा गहमी बनी रही. कई जगहों पर आज वामदल और राजद सहित विपक्षी पार्टियों ने जमकर प्रदर्शन किया. सरकार के खिलाफ नारे लगाए और उनका पुतला भी जलाया. लोगों का कहना था कि यह बिल किसानों के खिलाफ है. किसानों के प्रयास और इतने हंगामे के बावजूद सरकार अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं है. सरकार किसान विरोधी है. जब तक यह बिल वापस नहीं लिया जाता या किसानों की मांगों के हिसाब से संशोधन नहीं किए जाते हैं. तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. जिस तरीके से पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली और आसपास के इलाके में प्रदर्शन कर रहे हैं. उनको नैतिक समर्थन देने के लिहाज से वो भी जिलों में प्रदर्शन और धरनों का दौर जारी रखेंगे. 
  • जिले में 17 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद महज 17 बच्चों तक भी किताबें नहीं पहुंच पाईं. कोरोना ने जिस तरीके से शिक्षा को लीला है. उसी तरीके से सरकार की लापरवाही ने भी शिक्षा को पूरी तरह से निस्तेनाबूत कर दिया है. सरकार ने किताब के लिए करीब आठ लाख बच्चों के खातों में 17 करोड़ रुपए भेजे. किताब की छपवाई हुई और किताबों को बेचने के लिए और बच्चों तक पहुंचाने के लिए प्रखंड स्तर पर प्रदर्शनी लगाकर बच्चों को यह किताबें देनी थीं. कई बार प्रयास के बावजूद इसको लेकर जिले में घोषणाएं भी हुईं लेकिन किसी भी प्रखंड में कैंप नहीं लगाया जा सका. जिस कारण बच्चों तक किताबें नहीं पहुंच पाई.परीक्षा का समय आ चुका है लेकिन जिले के कई बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने किताबें देखी तक नहीं. 
  • निगरानी की रिपोर्ट के बाद अब मुजफ्फरपुर जेल में बंद कुख्यात अपराधियों को मुजफ्फरपुर के बाहर की जेलों में शिफ्ट करने की तैयारी शुरू हो गई है. इस संबंध में जेल आईजी ने हरी झंडी दे दी है. जेल प्रशासन ने इसके लिए ऐसे कुख्यातों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है. जिनके शार्गिद शहर में रहकर बदमाशी कर रहे हैं या अपराध को अंजाम दे रहे हैं. अब उन्हें आसपास के जिलों की बड़ी जेलों में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है. 
  • पिछले साल की तरह इस बार भी बीएड कालेजों में पचास फीसदी सीटें नहीं भर पाई हैं. यह हाल बीआए बिहार विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि सूबे के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में स्थिति लगभग यही है. दूसरे जिलों में बच्चों को भेजने के साथ ही फीस का जो स्ट्रक्चर है अब तक बच्चों की जेब तक नहीं पहुंच पाया है. जिस कारण बच्चे एडमिशन लेने के लिए तैयार नहीं हैं. 
  • कोरोना का संक्रमण घटने का नाम नहीं ले रहा है लेकिन अगर आप अस्पतालों में कोरोना वार्ड का हाल देखें सदर अस्पताल हो या कोरोना के लिए बनाए गए विशेष अस्पताल जो आर्मी के द्वारा तैयार हो या अन्य सरकारी अस्पताल, सभी की स्थिति लगभग एक जैसी ही है. मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन कोरोना ईलाज कराने के लिए मरीज अस्पताल आने को तैयार नहीं हैं. विशेषज्ञों ने बताया कि संक्रमितों का घर में आईसोलेट रहना सही तो है लेकिन हो सकता है कि इनमें कई ऐसे मरीज होंगे जिनकी स्थिति गंभीर होगी. अगर वो अस्पताल में भर्ती होकर ईलाज नहीं कराते तो उनके साथ कोई भी अनहोनी घटना हो सकती है. इसके साथ ही सरकार ने जांच की संख्या बढ़ाने की कवायद भी शुरू कर दी है.

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