रविवार को सूर्य देव की आरती से दुख-दर्द होंगे दूर, घर में आएगी खुशहाली, बरसेगा धन

Anuradha Raj, Last updated: Sat, 11th Sep 2021, 6:41 PM IST
  • रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित होता है. हिंदू धर्म में सूर्य भगवान की पूजा की जाती है. रविवार के दिन सूर्य देव की आरती का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है.
सूर्य देव की आरती

कल यानी 12 सितंबर को रविवार का दिन है, ऐसे में ये दिन सूर्य भगवान को समर्पित माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा और अराधना की जाए तो जीवन में बहुत ही शांति मिलती है. वैसे तो सूर्य देव को हर दिन नमस्कार करना बहुत ही ज्यादा शुभ माना जाता है. लेकिन रविवार के दिन का सूर्य नमस्कार बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है.ऐसी मान्यता है कि जो लोग रविवार के दिन सूर्यदेव की आरती सुनते या पढ़ते हैं उनके घर में खुशहाली आती है. ऐसे में आप जब भी सूर्य देव की पूजा करें तो उनकी आऱती जरूर सुनें.

भगवान सूर्यदेव की आरती

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

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