पटना में पराली जलाने पर 26 किसानों पर जुर्माना, वायु प्रदूषण AQI 354 बहुत खराब

Smart News Team, Last updated: 07/12/2020 08:40 PM IST
पटना में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए जिला प्रशासन जागरूकता सह चेकिंग अभियान चला रहा है. सोमवार को जांच में पटना का AQI 354 बेहद खराब की श्रेणी में रहा. जिला मजिस्ट्रेट कुमार रवि के अनुसार 4 दिसंबर तक पराली जलाने पर 26 किसानों पर जुर्माना लगाया गया है. किसानों को सरकार की सरकारी योजना के तहत किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता और सब्सिडी नहीं मिलेगी.
पटना में जिला प्रशासन वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए जागरूकता सभा चेकिंग अभियान चला रहा है.

पटना. वायु प्रदूषण जांचने के लिए जिला प्रशासन ने शहर के बाहरी इलाकों में पराली जलने से रोकने के लिए एक जागरूकता अभियान शुरू किया है. सोमवार को पटना का वायु प्रदूषण AQI 354 बहुत खराब की श्रेणी में रहा. इसके अलावा पराली जलाने वाले 26 किसानों पर भी जुर्माना लगाया गया है. इन किसानों को अब किसी सरकारी योजना के तहत कोई वित्तीय सहायता और सब्सिडी नहीं मिलेगी.

जिला मजिस्ट्रेट कुमार रवि ने कहा कि कृषि अधिकारी वायु प्रदूषण पर रोक लगाने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जागरूकता सहा चेकिंग अभियान चलाए रहे हैं. यह अभियान फसल की कटाई के मौसम तक जारी रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि 4 दिसंबर तक पराली जलाने वाले 26 किसानों पर जुर्माना लगाया जा चुका है. अब इन किसानों को दंड के रूप में किसी भी सरकारी योजना के तहत कोई वित्तीय सहायता और सब्सिडी नहीं मिलेगी.

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अन्य योजनाओं के साथ राज्य सरकार किसानों को 75 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली और 60 रुपये प्रति लीटर की दर से डीजल उपलब्ध कराती है. अब बता दें कि 1 टन फसलों की पराली जलाने से 3 किलो पार्टिकुलेट मैटर, 60 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाइऑक्साइड, 2 किलो सल्फर डाइऑक्साइड और 199 किलो राख निकलता है.

जिला मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा कि फसलों की पराली जलाने से रोकने के लिए हम लगातार प्रचार अभियान चला रहे हैं. इसके साथ ही किसानों को पराली जलाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा रही है. पिछले साल पूरे राज्य में 250 से अधिक किसानों पर जुर्माना लगाया गया था.

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पर्यावरण और उद्योग विकास केंद्र के मुख्य अधिकारी रमापति कुमार ने बताया कि जलवायु में परिवर्तन के कारण किसानों को खरीफ और रबी की फसलों की खेती के बीच में कम समय मिलता है. इसलिए वे समय बचाने के लिए पराली को जलाने के विकल्प को चुनते हैं. अगली बुवाई के लिए जल्दी से खेल तैयार करते हैं. हालांकि बिहार में मुट्ठी भर किसानों को छोड़कर किसी ने भी इसे बड़े पैमाने पर नहीं अपनाया है.

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