पटना: बच्चों को गोद लेना अब होगा आसान, DM की अनुमित कर सकते हैं एडॉप्ट

Ruchi Sharma, Last updated: Sat, 12th Feb 2022, 9:38 AM IST
  • बच्चा गोद लेने वाले मां बाप को न्यायालय की प्रक्रिया और इंतजार नहीं करना होगा. किशोर न्याय अधिनियम 2021 में न्यायालय के बदले डीएम को बच्चे को गोद देने का अधिकार दे दिया गया है.
प्रतीकात्मक तस्वीर

पटना. निसंतान दंपत्ति के लिए अब बच्चा गोद लेना पहले से और आसान हो जाएगा. बिहार सरकार बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने जा रही हैं जिससे अब बच्चों को गोद लेना और आसान हो जाएगा. अब बच्चा गोद लेने वाले मां बाप को न्यायालय की प्रक्रिया और इंतजार नहीं करना होगा. किशोर न्याय अधिनियम 2021 में न्यायालय के बदले डीएम को बच्चे को गोद देने का अधिकार दे दिया गया है. अब मां बाप को न्यायालय के चक्कर नहीं काटने होंगे, ना ही लंबा इंतजार करना पड़ेगा.

दरअसल कोरोना काल में कोर्ट से अनुमति नहीं मिलने पर कई बच्चों को गोद नहीं दिया जा सका है. साल 2019 तक ढाई सौ से अधिक बच्चों को गोद दिया गया था. करोना काल में बच्चों को गोद देने की संख्या 100 तक सिमट कर रह गई है. इसे विशेष दत्तक ग्रहण संस्थानों में अनाथ बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है. इस संबंध में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा राज्यों को नियम बनाने की प्रक्रिया की जा रही है.

किशोर न्याय अधिनियम संशोधन 202 हुआ पास

लोकसभा और राज्यसभा से किशोर न्याय अधिनियम संशोधन 202 पास हो गया है. राज्य के 24 जिलों में 25 विशेष दत्तक ग्रहण संस्थान चलाए जा रहे हैं. इन विशेष दत्तक ग्रहण संस्थानों में 220 बच्चे रह रहे हैं. दत्तक ग्रहण संस्थानों में 0 से 6 साल के बच्चे रखे जाते हैं.

49 साल के पाक सांसद ने 18 साल की लड़की से की तीसरी शादी,रोमांटिक Video किया शेयर

बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया

- बच्चों को गोद लेने के इच्छुक दंपत्ति को कारा वेबसाइट www.cara.nic.in परेशन करना पड़ेगा.

- 30 दिनों में संबंधित कागजात अपलोड करना होगा.

- नजदीकी विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संभावित दत्तकग्राही माता पिता के गृह अध्ययन कर प्रतिवेदन उसी वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है.

- फिर बाल कल्याण समिति द्वारा दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित बच्चों की प्रोफाइल दत्तक ग्राही माता-पिता को ऑनलाइन भेजी जाती है.

- ऑनलाइन वेब पोर्टल केरिंग carings के माध्यम से भेजा जाता है.

- यहां पर दंपत्ति बच्चों की प्रोफाइल देख कर दो दिनों के अंदर आरक्षित करना होता है.

- इसके बाद एडॉप्शन कमेटी के समक्ष 20 दिनों के अंदर उपस्थित होकर बच्चे को पूर्व दत्तक ग्रहण देखभाल में लिया जाता है.

- एजेंसी द्वारा परिवार न्यायालय में आवेदन कर दत्तक ग्रहण आदेश प्राप्त किया जाता है.

- इसके आधार पर जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाता है और कोर्ट आदेश में कानूनी माता-पिता घोषित कर दिया जाता है .

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें