कांग्रेस में लगातार बढ़ रहा विवाद, पंजाब- राजस्थान के बाद अब बिहार में भी आंतरिक कलह आई सामने

Smart News Team, Last updated: Fri, 16th Jul 2021, 2:14 PM IST
  • कांग्रेस में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. पंजाब और राजस्थान के बाद अब बिहार में भी आंतरिक कलह की बात सामने आई है. बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद प्रदेशाध्यक्ष के नाम के लिए राजेश कुमार राम के नाम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने विरोध जताया है.
कांग्रेस में लगातार आंतरिक कलह बढ़ रही है

पटना. देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के गिरते प्रदर्शन के साथ पार्टी में आंतरिक कलह की बातें आम हो गई हैं. राजस्थान और पंजाब के बाद अब बिहार में भी पार्टी की आंतरिक कलह सामने आ रही है. गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा. जिसके बाद अब पार्टी बिहार के नए प्रदेशाध्यक्ष की तलाश कर रही है. जानकारी के अनुसार इसके लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास ने विधायक और दलित नेता राजेश कुमार राम का नाम आगे बढ़ाया था लेकिन उनके नाम को लेकर विवाद हो गया. मदन मोहन झा की जगह पर दलित नेता राजेश कुमार राम को नया पीसीसी प्रमुख बनाने के प्रस्ताव का बिहार के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया. उनका कहना है कि नया प्रमुख ऊंची जाति का होना चाहिए.

आपको बता दें कि जदयू पहले ही कांग्रेस के नाराज विधायकों पर अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है. इसलिए कांग्रेस फूंक- फूंक कर कदम रही है. पार्टी विरोध करने वाले उन नेताओं के साथ शांति वार्ता की कोशिश कर रही है जिन्होंने राम के प्रस्ताव के खिलाफ एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल से शिकायत की है. इस समय कांग्रेस नाराज नेताओं को मनाने के लिए अलग-अलग योजनाओं पर विचार कर रही है.

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दरअसल, राजेश कुमार राम को लेकर प्रस्ताव का विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि राम एक पूर्व समाजवादी हैं जो कुछ साल पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे. वे कांग्रेस को बाहरी लोगों की तरह ही जानते हैं. इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि बिहार कांग्रेस के पास उच्च जाति के आधार के कुछ ही हिस्से बचे है जो उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से खत्म हो जाएंगे. इसके अतिरिक्त उनका यह भी कहना है कि ओबीसी, दलितों, मुसलमानों के प्रमुख वर्गों ने पहले ही बिहार कांग्रेस को छोड़ दिया था इसलिए पिछड़े समुदाय से पीसीसी प्रमुख की नियुक्ति करके यह प्रयोग करना बेकार है. मालूम हो कि विभिन्न समुदायों से पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा था. पिछले साल कांग्रेस की चुनावी हार के बाद मौजूदा पीसीसी प्रमुख मदन मोहन झा का इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है.

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