पटना जंक्शन पर RPF ने भारी मात्रा में बरामद किए कछुए, वन विभाग ने दर्ज किया केस

Smart News Team, Last updated: 13/10/2020 10:13 PM IST
  • बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पटना जंक्शन पर चल रही ट्रेनों की तलाशी में आरपीएफ को 102 कछुए बरामद हुए. यह कछुए ब्रह्मपुत्र मेल के स्लीपर कोच में बोरी में भरकर रखे हुए थे. कछुओं को अब वन विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है.
पटना जंक्शन पर RPF ने भारी मात्रा में बरामद किए कछुए, केस दर्ज

पटना. पटना जंक्शन पर रेल सुरक्षा बल (RPF) की टीम ने विशेष जांच के दौरान कछुआ की बड़ी खेप बरामद की. बिहार विधानसभा चुनाव के नजदीक होने से ट्रेनों में विशेष जांच की जा रही है. इसी क्रम में पटना जंक्शन पर चेकिंग के दौरान गाड़ी संख्या 05956 डाउन ब्रह्मपुत्र मेल के स्लीपर कोट से 102 कछुए बरामद हुए. 

इस मामले में जंक्शन के आरपीएफ पोस्ट कमांडर वीके सिंह ने बताया कि जांच के दौरान बह्मपुत्र मेल के स्लीपर के एस वन बोगी में किनारे चार बोरी रखी हुई थी. यात्रियों से जब उस बोरी के बारे में पूछा गया तो किसी ने स्वीकार नहीं किया कि बोरी किसकी है. आरपीएफ की टीम ने बोरी खोल कर देखा तो उसमें कछुआ रखे हुए थे. आरपीएफ ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी. 

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सूचना मिलने पर पटना वन प्रंमंडल पदाधिकारी रूचि सिंह के निर्देश पर पटना वन प्रमंडल के पश्चिमी वन परिक्षेत्र के रेंजर ने कछुआ को जब्ज किया. वन विभाग ने जब बोरी में बंद कछुओं की गिनती की तो कुल 102 कछुए निकले. वन विभाग ने इस मामले में अज्ञाक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. दूसरी तरफ आरपीएफ ने कछुआ की बरामदगी के बाद बाकि ट्रेनों में और भी सघन तलाशी शुरू कर दी. चर्चा है कि कछुओं को पश्चिम बंगाल में मीट के रूप में खाने और दवा बनाने के लिए ले जाया जा रहा था. कछुओं की इसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है.

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इस मामले में पटना वन प्रमंडल की डीएफओ रूचि सिंह ने बताया कि आपीएफ की सूचना पर रेंजर ने 102 कछुआ बरामद किया है. बरामद कछुए वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत संरक्षित जीव की श्रेणी में आते हैं. उन्होंने बताया कि इनका शिकार या व्यापार करना गैरकानूनी है. डीएफओ ने बताया कि बरामद कछुए में से चार-पांच कछुए घायल हैं. बाकी सभी स्वस्थ हैं. संबंधित प्रक्रिया पूरी कर अनुमति लेकर स्वस्थ कछुए तीन-चार दिन में गंगा में छोड़ दिए जाएंगे. बाकी घायल कछुओं की जांच के बाद इलाज किया जाएगा.

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