बागमती परियोजना के भू-अर्जन में सात करोड़ का घोटाला, आठ साल बाद फिर खुली फाइल

Sumit Rajak, Last updated: Fri, 25th Feb 2022, 10:48 AM IST
  • बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बागमती परियोजना में हुए सात घोटाले की फाइल 8 साल बाद बुधवार को फिर खोल दी गई है. इस घोटाले में सात कर्मियों की बर्खास्तगी और 117 लोगों पर नीलामवाद के मुकदमे के बाद जांच एक बार फिर शुरू हुई है.
फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बागमती परियोजना में हुए सात घोटाले की फाइल 8 साल बाद बुधवार को फिर खोल दी गई है. इस घोटाले में सात कर्मियों की बर्खास्तगी और 117 लोगों पर नीलामवाद के मुकदमे के बाद जांच एक बार फिर शुरू हुई है. भू-अर्जन निर्देशक सुशील कुमार ने इसकी बुधवार से फिर जांच शुरू की है और भू-अर्जन पदाधिकारी को सारे रिकॉर्ड के साथ तलब किया है. घोटाले का जिन्न 8 साल बाद बोतल से बाहर आने के बाद विशेष भू-अर्जन कार्यालय के बचे कर्मियों में हड़कंप मच गया है,

भू-अर्जन निदेशालय बागमती परियोजना के घोटाले में अब तक हुई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है. 7 करोड़ के घोटाले में 7 कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद बचे कर्मियों पर भी अब कार्रवाई की तलवार लटक गई है. भू-अर्जन निर्देशक सुशील कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जांच दल गठित कर दिया है. निर्देशक ने 1 दिन पहले बुधवार को ही जांच शुरू कर दी है. इस सिलसिले में भू-अर्जन पदाधिकारी मो. उमैर को बागमती परियोजना के सारे दस्तावेज के साथ पटना तलब किया है. जांच के दायरे में विभाग के वे सभी कर्मचारी हैं  जो संदेह का लाभ पाते हुए पिछली बार कार्रवाई से बच गए थे. इतना ही नहीं, जिन फर्जी लाभार्थीयों को मुआवजे के नाम पर सात करोड़ का भुगतान किया गया है. उनपर कार्रवाई में शिथिलता बरतने के मामले में भी जांच शुरू हो गई है.

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जिले में बागमती परियोजना घोटाला लंबे समय से खींचता चला आ रहा है. वर्ष 2009 में इस परियोजना के लिए राशि का आवंटन हुआ. वर्ष 2014 में सवा सौ फर्जी लाभार्थियों को मुआवजे का भुगतान किया गया. वर्ष 2016 में इसमें एफआईआरदर्ज की गई और 2018 में जांच के बाद 7 कर्मियों को विभाग ने बर्खास्त किया. 2 साल पहले बागमती परियोजना के लिए बनी विशेष भू-अर्जन कार्यालय का अस्तित्व समाप्त कर उसे कलेक्ट्रेट स्थित भू-अर्जन कार्यालय में समाहित कर दिया गया.

 

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