जिंदगी के 18 साल जेल में गुजार चुके थे बाहुबली नेता शाहबुद्दीन, पढ़िए पूरी कहानी

Smart News Team, Last updated: Sat, 1st May 2021, 7:38 PM IST
  • राजद के बाहुबली सांसद मो. शहाबुद्दीन के राजनीतिक जीवन का 13 साल बाहर व 18 साल जेल में ही गुजर गया.
जिंदगी के 18 साल जेल में गुजार चुके थे बाहुबली नेता शाहबुद्दीन, पढ़िए पूरी कहानी (फाइल फ़ोटो)

पटना: आरजेडी के बाहुबली नेता और लालू यादव के करीबी दो बार के विधायक और चार बार के लोकसभा सासंद शहाबुद्दीन की आज दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई. बताया जा रहा है की कोरोना संक्रमित होने के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था. पूर्व सांसद मु० शहाबुद्दीन के मौत की खबर मिलते ही उनके गृह जिला सिवान में उनके समर्थकों में मातम पसर गया. सुबह से मौत की मीडिया में चल रही खबरों के बीच हर कोई पुष्टि के लिए बेचैन था.

लेकिन जब दोपहर बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि की उनके समर्थक स्तब्ध रह गए. 1990 में राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले शहाबुद्दीन लगातार कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए. 1990 में पहली बार जीरादेई से निर्दलीय विधायक चुने गए. उसके बाद 1995 में जनता दल के टिकट पर दोबारा विधायक बने. फिर 1996, 1998, 1999 व 2004 में राजद के टिकट पर सीवान से सांसद चुने गए. हालांकि उनके राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव लगा रहा. इस बीच 13 अगस्त 2003 को पूर्व सांसद ने छोटपुर निवासी मुन्ना चौधरी अफरण और हत्याकांड मामले में कोर्ट में सरेंडर किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. 

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जेल में रहने के दौरान ही उन्होंने आरजेडी के टिकट पर 2004 में सांसद का चुनाव लड़ा व जीत हासिल की. फास्ट ट्रैक कोर्ट -1 के आदेश पर शपथ लेने के लिए दिल्ली गए. इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर 15 दिन के अंदर उन्हें जेल आना पड़ा. इस बीच तत्कालीन डीएम सीके अनिल ने उन्हें बेऊर जेल स्थानांतरित कर दिया. फिर कोर्ट के आदेश पर 22 फरवरी 2005 को शहाबुद्दीन जेल से बाहर आए. लेकिन तत्कालीन डीएम सीके अनिल ने कंट्रोल ऑफ क्रिमिनल एक्ट (सीसीए) के तहत उन्हें जिला बदर कर दिया. जिसके बाद का समय दिल्ली व पटना में ही गुजरा. 

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इसी दौरान डीएम सीके अनिल व एसपी रत्न संजय ने उनके पैतृक गांव प्रतापपुर स्थित आवास पर छापेमारी की. इस दौरान उनपर अलग-अलग मामले में नौ-दस मुकदमा दर्ज किया गया. जिसके बाद हुसैनगंज थाने की तत्कालीन थानाध्यक्ष गौरी कुमारी उन्हें दिल्ली से रिमांड पर सीवान लेकर आईं. जिसके बाद उन्हें सीवान में जेल मैनुअल के उल्लंघन मामले में उन्हें भागलपुर जेल भेज दिया गया. जून 2006 में जेल के अंदर बने स्पेशल कोर्ट में सुनवायी के लिए उन्हें सीवान लाया गया. जहां चर्चित तेजाब कांड में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी. 

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उसके बाद अन्य मामले में भी सुनवायी चलती रही. इसी दौरान तत्कालीन डीएम महेन्द्र कुमार ने उन्हें भागलपुर जेल स्थानांतरित कर दिया. जहां जमानत मिलने के बाद 2018 में करीब तीन हफ्ते के लिए जेल से बाहर आए. तब बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट में उनके जमानत को चैलेंज की जिसके बाद लेकिन फिर उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. बाद में सुरक्षा कारणों से उन्हें भागलपुर जेल से तिहाड़ भेज दिया गया. बता दें की इसतरह राजद के बाहुबली सांसद मो. शहाबुद्दीन के राजनीतिक जीवन का 13 साल बाहर व 18 साल जेल में ही गुजर गया.

 

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