पटना

बिहार के बाबाधाम पर कोरोना का काला साया, बैकटपुर मंदिर पर कल से लटक जाएगा ताला

Smart News Team, Last updated: 02/07/2020 04:55 PM IST
  • बिहार की राजधानी पटना से सटे बैकटपुर गांव में स्थित श्रीगौरीशंकर बैकुंठनाथ मंदिर पर भी कोरोना का काला साया छा गया है।
बिहार के बाबाधाम पर कोरोना का साया, बैकटपुर मंदिर पर कल से लटक जाएगा ताला

बिहार की राजधानी पटना से सटे बैकटपुर गांव में स्थित श्रीगौरीशंकर बैकुंठनाथ मंदिर पर भी कोरोना का काला साया छा गया है। कोरोना वायरस की कहर के बीच खुसरूपुर प्रखंड स्थित श्रीगौरीशंकर बैकुंठनाथ मंदिर बैकटपुर में इस बार श्रावणी मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। इस संबंध में बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी आंनद प्रकाश ने दी।

राज्य में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार का स्पष्ट आदेश है कि इस साल सावन महीने में प्रदेश सभी मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक नहीं होगा। न तो इस बार श्रवणी मेले का आयोजन होगा और न ही कहीं भी किसी शिवलिंग पर जलाभिषेक होगा। इस साल सावन में सिर्फ पुजारी ही मंदिरों में भगवान का पूजन,आरती व राजभोग करेंगे। इस मौके पर मंदिरों में आमलोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

कोरोना की वजह से इस बार शिव मंदिर में जलाभिषेक और पूजापाठ पर पूरी तरह से रोक रहेगी, ताकि कोरोना के संक्रमण से बचा जा सके। हालांकि, इस रोक से भक्तों और श्रद्धालुओं में निराशा का माहौल है। वहीं, वे यह भी मान रहे हैं कि कोरोना से बचने के लिए सरकार का यह कदम एकदम उचित है।

दरअसल, राजधानी पटना से सटे बैकटपुर गांव में प्राचीन और एतिहासिक शिवमंदिर स्थित है, जिसे श्री गौरीशंकर बैकुण्ठधाम के नाम से भी जाना जाता है। इस प्राचीन मंदिर की महिमा अतीत के कई युगों से जुड़ी हुई है।

प्राचीन एवं ऐतिहासिक बैकटपुर मंदिर में श्रावणी मेले पर लगी रोक

इस श्री गौरीशंकर बैकुण्ठधाम मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां शिवलिंग रूप में भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती भी विराजमान हैं। इसके अलावा, शिवलिंग पर 108 छोटे-छोटे शिवलिंग भी बने हुए हैं।

एक बड़ा शिवलिंग भगवान शंकर के प्रतीक के रूप में है, वहीं छोटे शिवलिंगों को रूद्र कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि बैकठपुर जैसा शिवलिंग पूरी दुनिया में कहीं और नहीं है। इसका जिक्र रामायण में भी किया गया है। प्राचीनकाल में गंगा के तट पर बसा यह क्षेत्र बैकुंठ वन के नाम से जाना जाता था। आनंद रामायण में इस गांव की चर्चा बैकुंठा के रूप में हुई है।

अन्य खबरें