BAU नियुक्ति घोटाले में पूर्व मंत्री मेवालाल पर गवर्नर की मंजूरी के बाद चार्जशीट

Smart News Team, Last updated: Mon, 23rd Nov 2020, 5:45 PM IST
  • बिहार में नितीश सरकार के अगुवाई में भी एनडीए सरकार में शिक्षा मंत्री बनने के बाद कुछ घंटों में इस्तीफा देने वाले तारापुर के विधायक मेवालाल चौधरी के ऊपर बीएयू में सह सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में घोटाले में मुश्किलें बढ़ सकती है. राजभवन से अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद कोर्ट में  दायर करेगी.
राजभवन से अभियोग आने के बाद विधायक मेवालाल चौधरी के खिलाफ दायर होगी चार्टशीट 

बिहार में नीतीश सरकार में शिक्षा मंत्री बन इस्तीफा देने वाले तारापुर के विधायक मेवालाल चौधरी की बीएयू में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति घोटाले की वजह से मुश्किलें बढ़ सकती है. मेवालाल बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके है. कुलपति रहने के दौरान इनके ऊपर सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति करने में घपला करने का आरोप लगा था. जिसके जांच के लिए एसएसपी आशीष भारती ने अभियोजन के लिए बीएयू के कुलपति को पत्र लिखा है. बीएयू के कुलाधिपति से अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस इस मामले में चार्टशीट दायर कर सकेगी.

इस मामले में पुलिस को कोर्ट में आरोप पत्र समर्पित करने के लिए अभियोजन की मंजूरी की आवश्यकता है. जिसके लिए एसएसपी ने विधायक मेवालाल और बीएयू के तात्कालिक सहायक निदेशक के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए कुलाधिपति से स्वीकृति मांगी है. अभियोजन के बारे में कुलपति डॉ सिंह ने बताया कि कानून विशेषज्ञों से सलाह मशविरा करने और राजभवन से निर्देश मिलने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा.

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इस मामले के अधिवक्ता संजय कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया में घोटाला करने बारे पूर्व वीसी मेवालाल के खिलाफ अपराध साबित हो गया है. अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद ही भागलपुर पुलिस चार्टशीट दायर करेगी. जिसके बाद कोर्ट में ट्रायल चलेगा. उन्होंने ये भी बताया कि विश्वविद्यालय की तरफ से सोमवार को अभियोजन का जवाब भी मिल सकता है.

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क्या है पूरा मामला

विधायक मेवालाल के कुलपति रहते 2011 में 161 कनीय वैज्ञानिक श सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति किया गया था. 2015 में असफल प्रतिभागियों ने आरटीआई के जरिए अंक की मांग की थी. जिसमे असफल रहे प्रतिभागियों ने अंक में हेराफेरी का आरोप लगाया था. यह मामला राजभवन पहुचा और इसकी जांच हाईकोर्ट के जज ने की थी, जिसमें उनके खिलाफ आरोप सच पाया गया था. जिसमे तत्कालीन कुलपति रहे डॉ मेवालाल चौधरी को नियुक्ति में अनियमितता का दोषी पाया गया था. इस आधार पर राजभवन ने मेवालाल के खिलाफ 2017 में सबौर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी.

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