EPFO: इंप्लायज प्रोविडेंट फंड के क्या होते हैं फायदे, जानें हर छोटे-बड़े लाभ

Smart News Team, Last updated: Tue, 6th Jul 2021, 11:36 AM IST
  • EPF की शुरुआत 1952 में की गई थी. ये स्किम तब से चलती आ रही है ये काफी भरोसेमंद स्किम है जिसपर लोग आज भी भरोसा करते हैं. बड़ी संख्या में कर्मचारी इस स्कीम में पैसा इंनेवेस्टमेंट करते हैं. 
EPFO

इंप्लायज प्रोविडेंट फंड को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं. उनसे जुड़ी काफी सारी जानकारी लोग जानना चाहते हैं. चलिए जानते हैं पीएफ से जुड़ी कुछ अहम बातें. फीएफ का पैसा आपकी कमाई का कुछ हिस्सा होता है जिसमें कंपनी और भी शेयर करती है. EPF की शुरुआत 1952 में की गई थी. ये स्किम तब से चलती ई रही है ये काफी भरोसेमंद स्किम है जिसपर लोग आज भी भरोसा करते हैं. बड़ी संख्या में कर्मचारी इस स्कीम में पैसा इंनेवेस्टमेंट करते हैं. इस पूरी स्कीम में तीन अलग-अलग पक्ष होते हैं. पहला कर्मचारी, दूसरा नियोक्ता (Employer) और तीसरा सरकार.

कर्मचारी और नियोक्ता का योगदान

इंप्लायज प्रोविडेंट फंड में कर्मचारी के अपने बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (dearness allowance) को जोड़ कर 12% योगदान करना होता है. इसके बाद नियोक्ता को भी इतना ही योगदान करना होता है. ये पैसा रिटायरमेंट के वक्त निवेशक को ब्याज सहित पूरा पैसा वापस मिलता है. कर्मचारी के द्वारा किया 12% ईपीएफ खाते में जाता है. साथ ही नियोक्ता के 12% में से 3.67% EPF खाते में और बाकि 8.33% EPS (Employee Pension Scheme) खाते में जाता है. 12% से अधिक EPF में योगदान करने पर यह VPF में तब्दील हो जाता है.

UPCET 2021: UPCET परीक्षा के लिए आवेदन की आखिरी तारीख आज, जल्द करें अप्लाई

कुछ ऐसी स्थिति में जहां 12 प्रतिशत से कम योगदान की भी मान्यता है. किसी कंपनी में 20 से कम लोग काम करते हैं तो ऐसी स्थिति में कर्मचारी और नियोक्ता 10%-10% प्रतिशत तक का योगदान कर सकते हैं. नियोक्ता 10%-10% प्रतिशत तक का योगदान कर सकते हैं.

क्या है EPF के फायदे

EPF स्कीम के कई फायदे हैं, इसमें इसकी ब्याज दर काफी अच्छी है. इस समय इस स्कीम के तहत 8.5% की ब्याज दर मिल रही है. यह ब्याज दर मंथली बेसिस पर कैलकुलेट किया जाता है.

आयकर में 80सी के तहत कर छूट

आयकर की धारा 80सी के तहत EPF में जमा 1.5 लाख रुपये पर आयकर छूट प्राप्त होता है.सैलरी पर बनने वाले टैक्स में 12 प्रतिशत तक की बचत कर सकते हैं. यह लाभ नए टैक्स कानून में बंद कर दिया गया है पुरानी कर व्यवस्था का चयन कर इस लाभ का फायदा अभी भी उठा सकते हैं. बता दें, कि 7.5 लाख रुपये से ज्यादा योगदान अब टैक्स के दायरे में है.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें