यहां प्रसव के एक माह पहले ही गर्भवती महिलाएं छोड़ देती हैं गांव, जानिए इसका कारण

Ruchi Sharma, Last updated: Tue, 4th Jan 2022, 9:55 AM IST
  • बिहार के कैमूर जिला का भुड़कुड़ा गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. यहां गर्भवती महिलाएं प्रसव होने से एक माह पहले ही अपना गांव छोड़ देती हैं. क्योंकि इस गांव के अस्पताल में इनके इलाज या प्रसव कराने का प्रबंध नहीं है. भगवानपुर या भभुआ के अस्पताल में जाने के लिए घाटी उतरने के बाद उन्हें 25-30 किमी. की दूरी तय करनी पड़ती है.
यहां प्रसव के एक माह पहले ही गर्भवती महिलाएं छोड़ देती हैं गांव, जानिए इसका कारण

पटना. कहते हैं भारत गांवों का देश है. भारत की आत्मा गांव में विकास करती है. सरकार गांव में सुविधाएं मुहैया कराने का दावा करती हैं, लेकिन यह दावा तब खोखला नजर आता है जब आज भी कई गांवों में सड़कें, बिजली, शुद्ध पेयजल, अस्पताल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी दिखती है. कई गांव विकास की किरण से अभी भी पिछड़े हैं. कुछ ऐसा ही हाल है बिहार के कैमूर जिला का भुड़कुड़ा गांव का. यह एक ऐसा गांव है, जहां की गर्भवती महिलाएं प्रसव होने से एक माह पहले ही अपना गांव छोड़ देती हैं. क्योंकि इस गांव के अस्पताल में इनके इलाज या प्रसव कराने का प्रबंध नहीं है.

यहीं नहीं प्रसव पीड़ा से कराह रहीं महिलाओं को तीन किमी. पहाड़ की घाटी उतरकर अस्पताल जाना मुश्किल काम है. भगवानपुर या भभुआ के अस्पताल में जाने के लिए घाटी उतरने के बाद उन्हें 25-30 किमी. की दूरी तय करनी पड़ती है. अगर घाटी के नीचे के गांव में जाएंगी तो वहां झोला छाप डॉक्टर मिलेंगे, जिनसे इलाज कराना संभव नहीं है.

एक माह पहले ही गर्भवती महिलाएं छोड़ देती हैं गांव

गांव के अशोक खरवार बताते हैं कि गर्भवती महिलाएं प्रसव होने से एक माह पहले मैदानी भाग में रहनेवाले अपने किसी रिश्तेदार के घर चली जाती हैं. प्रसव होने के एक माह बाद वहां से वह अपने गांव लौटती हैं. इनकी सेवा के लिए घर की एक महिला सदस्य भी साथ में जाती हैं, ताकि रिश्तेदारों पर गर्भवती महिला बोझ नहीं बन सकें. स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने तथा पीने के लिए शुद्ध दूध मिल जाने से इनके बच्चे भी स्वस्थ जन्म लेते हैं.

 

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स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचते ड्यूटी करने

कैमूर पहाड़ी पर बसा भुड़कुड़ा गांव भगवानपुर प्रखंड की रामगढ़ पंचायत का हिस्सा है. जहां के मरीजों को अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए तीन किमी. की घाटी उतरकर मैदानी भाग में आना पड़ता है. सरकार ने प्राथमिक उपचार करने के लिए यहां उपस्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया है. इसके लिए भवन का भी निर्माण कराया गया है. लेकिन, परेशानी यह है कि इस अस्पताल में कोई स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी करने के लिए नहीं पहुंच पाते हैं. इस कारण उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन भी देखरेख के अभाव में बदहाल होने लगा है. खिड़की-दरवाजे टूट गए हैं.

स्वास्थ्य सेवा भगवान भरोसे

गांव के शंभू खरवार ने बताया कि बताया कि पहाड़ पर स्थित इस गांव में पहुंचने का रास्ता काफी कठिन है. स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य सेवा भगवान भरोसे है. ग्रामीणों ने बताया कि उपस्वास्थ्य केंद्र पर इलाज की सुविधा नहीं मिलने से इस गांव के बीमार ग्रामीणों को घाटी से उतरकर रामगढ़ और अधौरा सड़क से मसानी व छताप के रास्ते 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तय कर भगवानपुर या भभुआ शहर में इलाज कराना पड़ता है.

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