बिहार: 150 साल पुरानी धूप घड़ी की उखाड़ ले गए चोर, ब्रिटिश काल में हुआ निर्माण

Komal Sultaniya, Last updated: Wed, 9th Feb 2022, 5:13 PM IST
  • बिहार में शातिर चोरों ने एक ऐतिहासिक धरोहर को निशाना बनाते हुए हाथ साफ किया है. रोहतास जिले के डेहरी के एनीकट इलाके से चोरों ने 150 साल पुरानी और विख्यात धूप घड़ी को क्षतिग्रस्त कर उसके धातु का ब्लेड चुरा लिया. बताया जाता है कि ब्रिटिश काल में 1871 ईस्वी में इसका निर्माण कराया गया था तब से ये संरक्षित था.
बिहार: 150 साल पुरानी धूप घड़ी की उखाड़ ले गए चोर, ब्रिटिश काल में हुआ निर्माण

बिहार में शातिर चोरों ने एक ऐतिहासिक धरोहर को निशाना बनाते हुए हाथ साफ किया है. रोहतास जिले के डेहरी के एनीकट इलाके से चोरों ने 150 साल पुरानी और विख्यात धूप घड़ी को क्षतिग्रस्त कर उसके धातु का ब्लेड चुरा लिया. बताया जाता है कि ब्रिटिश काल में 1871 ईस्वी में इसका निर्माण कराया गया था तब से ये संरक्षित था. 

बता दें कि, दूर-दूर से लोग इस ऐतिहासिक धूप घड़ी को देखने आते थे, लेकिन रखरखाव एवं सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने के कारण चोरों ने धूप घड़ी पर हाथ साफ कर दिया. लोगों ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी. पुलिस मौके पर पहुंच इसकी जांच कर रही है. डेहरी ऑन सोन के एनीकट रोड में आज भी लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुरानी धूप घड़ी का उपयोग उस रास्ते से आने-जाने वाले लोग समय देखने के लिए करते थे. जिस तरह कोणार्क मंदिर के पहिए सूर्य की रोशनी से सही समय बताते हैं. ठीक उसी प्रकार यह धूप घड़ी भी काम करती थी.

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शहर का यह यह इलाका अति सुरक्षित माना जाता है, यहां डीआईजी, एसपी, एएसपी सहित तमाम आला पुलिस अधिकारियों के कार्यालय और आवास है. इसके बावजूद चोरों ने धूप घड़ी को क्षतिग्रस्त कर उसे चुरा लिया. बता दें कि 'सन- वॉच' का परिसर भी पहले से टूटा हुआ है. स्थानीय प्रशासन ने इसका रख-रखाव नहीं किया. जिसका नतीजा यह हुआ कि चोरों ने इस धूप घड़ी को चुराकर डेहरी की एक पहचान को खत्म कर दिया. स्थानीय लोग इस करतूत से काफी मायूस हैं. उधर मौके पर पुलिस पहुंच गई है और मामले की जांच कर रही है.

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1871 में स्थापित राज्य की यह ऐसी घड़ी है जिससे सूर्य के प्रकाश से समय का पता चलता है. तब अंग्रेजों ने सिंचाई विभाग में कार्यरत कामगारों को समय का ज्ञात कराने के लिए इस घड़ी का निर्माण कराया गया और एक चबूतरे पर स्थापित किया गया था. इसी वजह से इसका नाम धूप घड़ी रखा गया. इस घड़ी में रोमन और हिन्दी के अंक अंकित है, उस समय नहाने से लेकर पूरा कामकाज समय के आधार पर होता था.

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घड़ी के बीच में धातु की त्रिकोणीय प्लेट लगी है. कोण के माध्यम से उस पर नंबर अंकित है. शोध अन्वेषक के अनुसार यह ऐसा यंत्र है, जिससे दिन में समय की गणना की जाती है. इसे नोमोन कहा जाता है. यंत्र इस सिद्धांत पर काम करता है कि दिन में जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से पश्चिम की तरफ जाता है. उसी तरह किसी वस्तु की छाया पश्चिम से पूर्व की तरफ चलती है. सूर्य लाइनों वाली सतह पर छाया डालता है, जिससे दिन के समय घंटों का पता चलता है.

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