पटना

बिहार में 94000 प्राथमिक शिक्षकों की बहाली रुकी, HC के बाद शिक्षा विभाग का फैसला

Smart News Team, Last updated: 09/07/2020 09:58 AM IST
  • बिहार में 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया पर पटना हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया को शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
Bihar 94000 Teacher recruitment (File Photo)

बिहार में शिक्षक बहाली की प्रक्रिया फिलहाल के लिए स्थगति कर दी गई है। बिहार में 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया पर पटना हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया को शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। बुधवार को पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए राज्य की सभी नियोजन इकाइयों को मेधा सूची निर्माण आदि पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

बता दें कि पिछले दिनों बिहार में 94000 प्राथमिक शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया के नियमों में बदलाव को चुनौती देने वाली याचिका की सुनावाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिक्षक बहाली पर फिलहाल रोक लगा दी थी। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी।

बिहार में 94000 प्राथमिक शिक्षकों की बहाली पर रोक, पटना HC ने सरकार को किया तलब

शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक, एनआईओएस द्वारा 18 माह का सेवाकालीन डीईएलएड कोर्स करने वाले एवं टीईटी-सीटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से आवेदन 14 जुलाई तक लिए जाएंगे लेकिन उसके आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी। शिक्षा विभाग द्वारा करीब 94 हजार शिक्षकों के नियोजन के मामले में 17 दिसम्बर, 2019 को आदेश दिया था कि पहली से पांचवीं कक्षा तक के शिक्षकों की नियुक्ति में दो साल का डीईएलएड कोर्स करने वालों को प्राथमिकता मिलेगी। इस कोटि के अभ्यर्थियों के नहीं मिलने पर शिक्षा स्नातक (बीएड) योग्यताधारियों का चयन किया जाएगा। दोनों की मेधा सूची अलग-अलग बनेगी। यह आदेश मेधा सूची के निर्माण से संबंधित था जिसपर शिक्षा विभाग ने 3 जुलाई को रोक लगा दिया है। 

दरअसल, पटना हाई कोर्ट ने प्रारम्भिक शिक्षक बहाली प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सरकार को 4 सितंबर तक जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने नीरज कुमार सहित 71 सीटीईटी परीक्षा पास उम्मीदवारों की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।

आवेदकों की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार और रीतिका रानी ने कोर्ट को बताया कि शिक्षा विभाग ने प्राइमरी टीचर की बहाली के लिए गत वर्ष 5 जुलाई को एक अधिसूचना जारी की। उनका कहना था कि इस अधिसूचना के आलोक में विभाग ने 8 जून को प्रारम्भिक शिक्षक बहाली के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया।

विज्ञापन के अनुसार एनआईओएस द्वारा संचालित सेवाकालीन 18 माह के डीईएलईडी एंव टीईटी तथा सीटीईटी पास उम्मीदवार 15 जून से 14 जुलाई तक आवेदन दे सकते हैं।उनका यह भी कहना था कि विज्ञापन में ही मेघा सूची की तैयारी सहित उसका अनुमोदन, सूची का प्रकाशन, आपत्ति,आपत्ति का निराकरण सभी के लिए समय सीमा तय किया गया है।

इसी बीच विभाग ने 15 जून को एक स्मृतिपत्र जारी कर सीटीईटी पास उम्मीदवारों का आवेदन नही लेने का निर्देश जारी किया। आवेदकों के वकील का कहना था कि एक बार विज्ञापन प्रकाशित कर दिये जाने के बाद विज्ञापन के शर्तो में फेर बदल नही किया जा सकता।लेकिन विभाग ने ऐसा कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि 2012 में टीईटी परीक्षा पास छात्रों की मान्यता अवधि को बढ़ा कर 14 मई 2021कर दिया गया है और 2019 में पास सीटीईटी परीक्षा के उम्मीदवारों का आवेदन नही लेना अपने आप मे गैरकानूनी है।

उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में लगभग 94 हजार शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल कोर्ट ने आवेदको की ओर से दी गई दलील को मंजूर करते हुए बहाली प्रक्रिया पर रोक लगा दी। साथ ही मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 4 सितबंर तय की।

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