बिक्रम विधानसभा सीट पर किसका लहराएगा परचम, 1967 के बाद कांग्रेस 2015 में जीती

Smart News Team, Last updated: 15/09/2020 07:02 AM IST
  • बिहार विधानसभा 2020 चुनाव आगामी अक्टूबर में होने वाले हैं इसके लिए कई क्षेत्रों में कौन अपना परचम लहराएगा इसके लिए कयास लगने शुरू हो गए हैं. पटना के बिक्रम विधानसभा सीट पर 1967 के बाद कांग्रेस का वर्चस्व टूट गया था. 
बिहार विधानसभा 2020 चुनाव में बिक्रम विधानसभा पर किसका लहराएगा परचम

पटना. बिहार विधानसभा 2020 के नजदीक आते ही चुनावों और क्षेत्रों से जीतने वाले विधायकों के काम का आंकलन शुरू हो गया है.वहीं पटना के बिक्रम क्षेत्र पर इस चुनाव किसका ध्वज लहराएगा इसके लिए कयास लगने शुरू हो गए हैं. बिक्रम विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 1967 के बाद से ही कांग्रेस का वर्चस्व टूटना शुरू हो गया था इसके बाद पिछले चुनाव 2015 में ही कांग्रेस ने अपना कब्जा इस क्षेत्र पर पाया था. महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ सिंह ने भाजपा के अनिल कुमार को रिकॉर्ड वोटों से हराया था.

कांग्रेस से सिद्धार्थ सिंह को 2015 विधानसभा चुनावों में 94 हजार से ज्यादा वोट मिले थे वहीं बीजेपी के अनिल कुमार को 49 हजार को मत मिले थे. सिद्धार्थ सिंह करीब 44 हजार वोटों से जीते थे. वहीं इस वर्ष होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान की स्थिति बनी हुई है.  

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महागठबंधन की तरफ से विधायक सिद्धार्थ सिंह का कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होना तय माना जा रहा है. वहीं बीजेपी के पूर्व विधायक अनिल कुमार टिकट पाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं. 

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वहीं बिक्रम विधानसभा क्षेत्र में परेशानियों का ढेर है लेकिन इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा दो दशक पहले बना बिक्रम ट्रामा सेंटर का उद्घाटन अभी तक नहीं किया गया है. इस मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार आंदोलन किया है. इसी के साथ बिक्रम का ऐतिहासिक गांधी आश्रम, जिला परिषद का डाकबंगला, त्रिभुवन पुस्तकालय का भी आजतक जीवन उद्धार नहीं हो पाया है. पटना के सोन कैनाल में खेती के समय पानी नहीं मिलना भी किसानों की प्रमुख समस्या है. 

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