बिहार चुनाव: मसौढ़ी सीट पर RJD और JDU की जबरदस्त भिड़ंत, 5 बार से शह-मात का खेल

Smart News Team, Last updated: 04/10/2020 10:43 AM IST
  • बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में मसौढ़ी विधानसभा सीट पर इस बार आरजेडी और जेडीयू में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल सकती है. पांच बार के चुनाव में दोनों में शह-मात का खेल रहा है. दोनों पार्टियों ने 2015 में महागठबंधन का हिस्सा रहकर चुनाव जीता था. 
बिहार चुनाव: मसौढ़ी सीट पर RJD और JDU की जबरदस्त भिड़ंत, 5 बार से शह-मात का खेल

मसौढ़ी. मनोज कुमार. बिहार विधानसभा चुनावों में मसौढ़ी विधानसभा से आरजेडी और जेडीयू के बीच में हर बार शह मात का खेल चलता है. पिछले पांच चुनावों में इस सीट से तीन बार आरजेडी ने तो दो बार जेडीयू ने जीत हासिल की है. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन से आरजेडी की प्रत्याशी रेखा ने अपनी प्रतिद्वंदी एनडीए की हम प्रत्याशी नूतन पासवान को करीब 40 हजार वोटों से हराया था.

बिहार चुनाव 2015 में आरजेडी और एनडीए एक ही सिक्के पहलू थे. जिससे इलाके की दो बहुल जातियों यादव और कुर्मी के मतों का बंटवारा नहीं हुआ था और महागठबंधन प्रत्याशी की जीत हुई थी. वहीं इस बार आरजेडी और जेडीयू अलग-अलग खैमे में हैं. दोनों ही तरफ से इस सीट पर कब्जा पाने के लिए पूरी ताकत लगाई जा सकती है. आरजेडी-कांग्रेस और भाजपा मसौढ़ी इलाके के क्षेत्रीय दलों को अपने साथ करने में लगे हुए हैं. 

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मसौढ़ी की अनेकों समस्याएं हैं जिन्हें आजतक किसी सुलझाया नहीं गया है. राजधानी से सटे इस विधानसभा क्षेत्र को अनुमंडल बने 40 साल हो गए हैं लेकिन शवों के पोस्टमार्टम के लिए एक रूम नहीं बन पाया है. जिसके कारण पुलिस को किसी भी घटना के बाद शव को परीक्षण के लिए पटना मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है. इसी के साथ शहर में लगने वाला महाजाम से निजात देने के लिए दो साल पहले ही पूर्व तारेगना रेलवे गुमटी पर आरओबी निर्माण शुरू हुआ है लेकिन काम इतना धीरे है कि आजतक पूरा नहीं हो पाया है तो पुल कब पूरा होगा इस सोच में मसौढ़ीवासी परेशान हैं.  

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मसौढ़ी में बहुप्रतिक्षित किसानों की हितकारी सिंचाई परियोजना बेर्रा बांध निर्माण का काम लगभग चार सालों से अधूरा ही पड़ा है. यहां तक की आजादी के 73 साल बाद भी मसौढ़ी विधानसभा क्षेत्र में एक भी मान्यताप्राप्त महाविद्यालय की स्थापना नहीं हुई है. यह मसौढ़ीवासियों के बच्चों के भविष्य पर एक ग्रहण की तरह है. 

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