बिहार: इंजीनियरिंग कॉलेजों में बदला नियम, सीट फुल नहीं तो फिर प्रवेश परीक्षा

Smart News Team, Last updated: Wed, 11th Aug 2021, 3:54 PM IST
  • बीसीईसीई ने बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन प्रोसेस में बदलाव किया है. अगर बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन के बाद भी सीटें बच जाती है तो दोबारा प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी. जो विद्यार्थी जेईई मेन की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे उनके लिए अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी.
इंजीनियरिंग कॉलेजों में बदला नियम, सीट फुल नहीं तो फिर प्रवेश परीक्षा

पटना: बीसीईसीई ने बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन प्रोसेस में बदलाव किया है. अगर बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन के बाद भी सीटें बच जाती है तो दोबारा प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी. बीसीईसीई के अनुसार बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों में जेई मेंस की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के नामांकन के बाद भी अगर सीटें बचती है तो बिहार के वैसे छात्र-छात्राओं को भी दाखिले के लिए एक और मौका दिया जाएगा जो जेईई मेन की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे. इन विद्यार्थियों के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी.

बीसीईसीई के ओएसडी अनिल कुमार के मुताबिक जेईई परीक्षा में शामिल छात्रों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं. इन्हीं सीटों को भरने के लिए दोबारा प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया है. बीसीईसीई ने बताया कि इसकी सूचना बोर्ड की ओर से भी जल्दी ही जारी कर दी जाएगी. इन कॉलेजों में एडमिशन प्रोसेस अक्टूबर से नवंबर के बीच आयोजित की जाएगी.

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इस कदम से इंजीनियरिंग कॉलेजों में सभी सीट भर जाएंगी. साथ ही ज़्यादा से ज़्यादा विद्यार्थियों का एडमिशन भी हो पायेगा. जो बच्चे सीटें कम पड़ जाने पर बिहार से बाहर 

एडमिशन लेते हैं उनके लिए ये नया नियम बिल्कुल सही है. दूसरे राज्यों में जाने के बजाय बिहार के छात्र यही के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन ले पाएंगे. मालूम हो कि राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों की बहाली भी की जा सकती है. इन कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए आवेदन भी मंगवाए गए हैं. बिहार के छात्र-छात्राएं सीएस, इलेक्ट्रॉनिक इलेक्ट्रिकल, और सिविल कोर्स में एडमिशन लेना ज्यादा पसंद करते हैं. क्योंकि इन कोर्सों में जॉब के चांसेस ज़्यादा होते हैं.

 

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