बीपीएससी में 64वीं रैंक लाने के बाद रद्द हुई उम्मीदवारी, जाने क्या रहा कारण

Smart News Team, Last updated: Sat, 12th Jun 2021, 10:48 PM IST
  • बीपीएससी में 64वीं रैंक लाने के बावजूद रौशन का चयन नही हो पाया. ऐसा इंटरव्यू में स्नातक के मूल प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाने के कारण हुआ. हालांकि बाद में प्रमाण पत्र स्पीड पोस्ट के जरिए बीपीएससी को भेज दिया गया था. रौशन ने बीपीएससी से अनुरोध किया है कि उनकी उम्मीदवारी को बहाल कर दिया जाए.
हाल ही में 64वीं BPSC का रिजल्ट जारी किया गया है. (प्रतिकात्मक फोटो)

पटना- बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (बीपीएससी) ने रिजल्ट जारी कर दिया है. जिसमें रौशन कुमार नाम के एक उम्मीदवार ने 64वीं रैंक प्राप्त की. लेकिन बीपीएससी ने रौशन की उम्मीदवारी रद्द कर दी. जिसके कारण रौशन बीपीएससी का इंटरव्यू पास करने के बाद भी चयनित नही हो पाए.

उम्मीदवारी रद्द करने के कारणों का जब रौशन ने पता लगाया तो पता चला कि उसने बीपीएससी के इंटरव्यू में स्नातक का मूल प्रमाण पत्र जमा नहीं कर पाया था. रौशन ने बताया कि टीएमबीयू प्रशासन के लापरवाही के कारण बीपीएससी में चयनित होने के बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली. रौशन ने आगे बताया कि उसने टीएमबीयू प्रशासन को अपने स्नातक के मूल प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए दो जनवरी को ही आवेदन दिया था. आवेदन में 6 जनवरी को बीपीएससी के इंटरव्यू के बारे में भी बताया गया था. लेकिन विश्वविद्यालय ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और रौशन को मार्च माह में मूल प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाया गया. जिसके बाद रौशन ने मूल प्रमाण पत्र मिलते ही तुरंत उसे बीपीएससी को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज दिया था. लेकिन इसके बावजूद बीपीएससी ने जब अंतिम परिणाम प्रकाशित किया तो उसमें रौशन की उम्मीदवारी रद्द थी.

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रौशन लालूचक गुमटी नंबर 12 का रहने वाला है. रौशन ने बताया कि उसने इस परीक्षा के लिए बहुत कड़ी मेहनत की थी. लेकिन मेहनत के बाद भी सभी तीनो स्तर ( पीटी, मैंस, इंटरव्यू) के परीक्षा को पास करने के बाद भी परिणाम चयनित नहीं हो पाए. उन्होंने बताया कि बीपीएससी के लिए उन्होंने सेल्फ स्टडी की थी. रौशन बीपीएससी से अनुरोध कर रहें हैं कि उनकी उम्मीदवारी को बहाल कर दिया जाए.

बिहार जैसे राज्यों में राज्य स्तरीय सभी विश्वविद्यालयों का हाल यही है कि एक मूल प्रमाण पत्र के लिए छात्रों को महीनों और कभी-कभी साल भर तक इंतजार करना पड़ता है. सालों साल से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के गैर जिम्मेदारी का यही आलम बना हुआ है. जिस पर ना कभी राज्य सरकारें ध्यान देती है और ना ही कोई प्रशासन इस व्यवस्था को ठीक करने की चेष्टा करती है.

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