बिहारवासियों को मिल सकती है और सस्ती बिजली, केंद्र से बनी सहमति

Smart News Team, Last updated: 13/01/2021 12:19 PM IST
  • लोगों को सस्ती बिजली देने के लिए बिजली घरों को मिलने वाले कोयले की गुणवत्ता और बिलिंग प्रक्रिया में सुधार पर केंद्र की सहमति बन गई है. खदान के बदले बिजली घरों में मिलने वाले कोयले के आधार पर ही बिलिंग की जाएगी. 
खदान के बदले बिजली घरों में मिलने वाले कोयले के आधार पर ही बिलिंग की जाएगी.

पटना. बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिजली उत्पादन के दामों में गिरावट लाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया था. इस मसले पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था. ऊर्जा मंत्री के पत्र के आलोक में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जवाबी पत्र ने बिहार सरकार को यह भरोसा दिया है, कि इस मामले को खुद देखेंगे. केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया है कि वे बिहार की मांग पर सकारात्मक, ठोस व प्रभावी कदम उठाएंगे. बिहार के लोगों को आने वाले दिनों में और सस्ती पिछली मिल सकती है. 

दरअसल लोगों को सस्ती बिजली देने के लिए बिजली घरों को मिलने वाले कोयले की गुणवत्ता और बिलिंग प्रक्रिया में सुधार पर केंद्र की सहमति बन गई है. खदान के बदले बिजली घरों में मिलने वाले कोयले के आधार पर ही बिलिंग की जाएगी. लंबे समय से बिहार सरकार द्वारा की जा रही इस मांग पर केंद्र से सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया है. बीते दिनों बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस मसले पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था. 

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ऊर्जा मंत्री के पत्र के आलोक में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जवाबी पत्र में बिहार सरकार को यह भरोसा दिया है कि इस मामले को वह खुद देखेंगे. केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया है कि वे बिहार की मांग पर सकारात्मक, ठोस व प्रभावी कदम उठाएंगे. इससे यह आशा जागी है कि बिहार के बिजली घरों को मिलने वाले कोयले के आधार पर बिलिंग होगी. जिसे राज्य सरकार को बिजली खरीदने के लिए कम पैसे खर्च करने होंगे. 

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इससे पहले देश भर के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन सहित कई प्रमुख मंच पर बिहार यह मांग करता रहा है. कि बिजली घरों में जिस गुणवत्ता का मिलता कोयला मिलता है, बिलिंग का पैमाना भी वही बने. मौजूदा व्यवस्था में जिस खदान से कोयला बिजली की आपूर्ति होती है, बिलिंग की व्यवस्था भी वहीं से होती है. इसके लिए थर्ड पार्टी एजेंसी कोयले का मूल्यांकन करती है. लेकिन यह प्रक्रिया बिजली घरों के लिए महंगी साबित हो रही है. क्योंकि थर्ड पार्टी जिस कोयले की गुणवत्ता के आधार पर दाम तय करती है वह कोयला उससे बहुत कम कीमत पर बिजली घरों में आता है. 

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इस तरह की घटनाएं पहले भी अक्सर सामने आती रहती हैं और बिजली घरों की ओर से इस पर लिखित पत्र भेजकर भी विरोध भी दर्ज कराया गया है. लेकिन उसका कोई खास असर नहीं होता है. विदेशों से आने वाले कोयले की गुणवत्ता बिजली घरों में मापी जाती है. ऐसी व्यवस्था के आधार पर बिहार सरकार ने केंद्र से आग्रह किया था कि कोयले की खदान के बदले बिजली घरों में ही मापी जाए और उसी के आधार पर बिलिंग की व्यवस्था की जाए. इससे बिजली उत्पादन में कम लागत आएगी और बिहार सरकार को कोयला खरीद में कम पैसा खर्च करना पड़ेंगे. इसका सीधा लाभ बिहार के अधिक से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा.

 

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