विरोध प्रदर्शन पर सरकारी टेंडर नहीं देने वाले DGP के आदेश पर नीतीश सरकार ने दी सफाई

Smart News Team, Last updated: Fri, 5th Feb 2021, 11:53 PM IST
  • बिहार पुलिस ने बीते दिनों विरोध प्रदेश करने वालों को सरकारी ठेका न मिलने की बात कही थी. जिस पर बिहार सरकार गृह अतिरिक्त मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने कहा कि ये कोई नया नियम नहीं, टेंडर देने की प्रक्रिया में ये नियम पहले से है.
बिहार डीजीपी ने अपने आदेश में कहा था कि प्रदर्शन करने वालों को सरकारी टेंडर और नौकरी नहीं मिलेगी. प्रतीकात्मक तस्वीर

पटना. बिहार में विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम करने वाले को सरकारी ठेका और नौकरी नहीं देने वाले पुलिस के बयान पर बिहार सरकार ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया है. इस बारे में शुक्रवार को गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा कि ये कोई नया नियम नहीं है सरकारी ठेका देने की प्रक्रिया में ये नियम पहले से ही है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी और डीजीपी एसके सिंघल ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार की आपराधिक छवि वाले व्यक्ति को सरकारी ठेका और नौकरी नहीं देना है जैसा कि सरकार के 2006 और 2020 के आदेश में कहा गया है. गृह अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि सरकारी अराजक तत्वों को लोकतांत्रिक अधिकार के नाम पर फायदा नहीं उठाने देगी.

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अतिरिक्त मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने कहा, डीजीपी ने अपने आदेश में सिर्फ ये कहा था कि आपराधिक छवि वाले लोगों को सरकारी ठेका नहीं मिलेगा. उन्होंने सरकारी नौकरियों के लिए कहा था कि उनको भी इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए जिससे ज्वाइनिंग के समय कोई दिक्कत न आए. अगर किसी पर चार्जशीट हुई है तो उसे भी पीवीआर में शामिल किया जाना चाहिए. आपको बता दें कि 21 जनवरी को पुलिस ने सरकारी ठेका लेने के लिए चरित्र प्रमाण अनिवार्य कर दिया था.

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अतिरिक्त मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने कहा कि सरकारी ठेकों में आवेदन करने के लिए पुलिस वेरीफिकेशन रिपोर्ट चरित्र प्रमाण पत्र के लिए बहुत जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट भी इस बारे में निर्देश दे चुकी है. सरकारी नौकरी में ज्वाइनिंग करने से पहले पीवीआर करवाना पड़ता है. यहां तक कि सब कॉन्ट्रै क्ट लेने वालों को पुलिस से चरित्र प्रमाण पत्र लेना पड़ता है

 

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