बिहार में कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में मीरा कुमार, तारिक अनवर, निखिल कुमार और राजेश राम

Prachi Tandon, Last updated: Wed, 15th Sep 2021, 7:38 PM IST
  • बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पुनर्गठन के प्रस्ताव पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की तरफ से असहमति जताई गई है. इसी के साथ बिहार कांग्रेस अध्यक्ष के लिए उम्मीदवारों के लिए प्रस्ताव रखा गया है. बिहार राज्य प्रभारी की रेस में अब मीरा कुमार, तारिक अनवर, निखिल कुमार राजेश राम शामिल हो गए हैं.
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में मीरा कुमार भी शामिल(फाइल फोटो)

पटना. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी बीपीसीसी के पुनगर्ठन के प्रस्ताव पर असहमति दिखाई है. बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास ने पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा है. राज्य प्रभारी दास ने चार लोगों का नाम सामने रखा है जिसमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, एआईसीसी महासचिव तारिक अनवर, पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार और कुटु्म्बा विधायक राजेश कुमार शामिल हैं. बिहार प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष मदन मोहन झा का कार्यकाल खत्म होने वाला है, इसी कारण से नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पार्टी में जोर-शोर से काम चल रहा है.

बिहार कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष मदन मोहन झा की जगह लेने के लिए और बीपीसीसी प्रेसिडेंट के पद के लिए मीरा कुमार, तारिक अनवर, निखिल कुमार और राजेश राम रेस में शामिल हैं. AICC के वरिष्ठ नेता ने बताया कि इसके साथ ही कार्यकारी अध्यक्ष के पदों के लिए कुमार आशीष, प्रवीण कुशवाहा और प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष अमिता भूषण समेत चार के नाम सुझाए गए हैं.  

बिहार के नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए पिछले महीने राज्य कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास ने राजेश राम को बीपीसीसी प्रमुख बनाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन पार्टी हाईकमांड वरिष्ठ नेताओं के विरोध को देखते हुए उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद, पूर्व बीपीसीसी चीफ अनिल शर्मा, मीरा कुमार और निखिल कुमार को यह डर था कि प्रदेश कांग्रेस में कोई भी फैसला निष्पक्ष नहीं हो पाएगा अगर प्रभारी, सह प्रभारी और अध्यक्ष एक ही समुदाय के होंगे. 

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बीपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष चंदन बागची ने बताया कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पुनर्गठन में एआईसीसी को सावधानी बरतनी चाहिए. जल्दबाजी में लिया निर्ण राज्य में संगठनात्मक ताकत को कमजोर कर सकता है. एआईसीसी के 5 राज्यों के प्रभारी रह चुके चंदन बागची कहते हैं, "पार्टी आलाकमान को बीपीसीसी के पुनर्गठन में केवल प्रदेश प्रभारी पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए." 

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