बिहार के कुख्यात डॉन पप्पू देव की संदिग्ध मौत, ऐसे खड़ा किया रंगदारी का साम्राज्य

Atul Gupta, Last updated: Mon, 20th Dec 2021, 7:57 PM IST
  • बिहार के कुख्यात डॉन पप्पू देव (Pappu Dev) की संदिग्ध हालत में मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक छाती में दर्द की शिकायत के बाद पप्पू देव को सदर अस्पताल भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पप्पू देव को कोसी क्षेत्र में विधायक और कंपनी उपनाम से भी जाना जाता है.
बिहार का कुख्यात डॉन पप्पू देव (फोटो- सोशल मीडिया)

पटना: बिहार के कुख्यात डॉन पप्पू देव की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है. कोसी इलाके में विधायक और कंपनी उपनाम से जाने जाने वाले पप्पू देव की मौत को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. पुलिस के मुताबिक छाती में दर्द की शिकायत के बाद पप्पू देव को अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि 18 दिसंबर की शाम पप्पू देव और उनके गुर्गे एक जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे. इस दौरान पुलिस और उनकी गैंग के बीच गोलीबारी हुई जिसके बाद मौके से भागने की कोशिश करते पप्पू देव ने एक दीवार से छलांग लगा दी जिससे उसकी छाती में चोट लगी. पुलिस के मुताबिक रात करीब दो बजे पप्पू देव को सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया जहां सुबह चार बजे उसकी मौत हो गई. वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना है कि पप्पू देव के शरीर पर चोट के कई निशान थे.

कौन था पप्पू देव?

90 के दशक में जब बिहार में अपहरण उद्योग खूब फल फूल रहा था उस दौरान बिहार में रंगदारी के तीन बड़े गुट थे. पहला था आनंद मोहन गुट, दूसरा था पप्पू यादव गुट और तीसरा था पप्पू देव गुट. सहरसा, मुजफ्फरपुर, कटिहार, किशनगंज, खगड़िया, पूर्णिया और बेगूसराय जिले में पप्पू देव गुट ने कई संगीन अपराध किए, एक वक्त था जब पप्पू देव की बिहार और उसके इलाकों में तूती बोला करती थी. 

जानकारी के मुताबिक पप्पू देव पर बिहार के अलग-अलग थानों में हत्या, रंगदारी, अपहरण जैसी संगीन धाराओं में करीब 150 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं. पप्पू देव का जन्म सहरसा के बिहरा गांव में हुआ था. 1994 में पप्पू देव सुर्खियों में तब आया जब वो पूर्णिया में रहते हुए बूटन सिंह गैंग का हिस्सा बना जिसे बाद में उसने छोड़ दिया और यूएसए कार्बाइन और एके 47 जैसे हथियार लेकर सहरसा भाग आया और अपना गैंग शुरू किया. इसके बाद धीरे-धीरे पप्पू देव ने बिहार से लेकर बंगाल तक अपना साम्राज्य स्थापित किया. इस दौरान उसने कई लोगों का अपहरण कर करोड़ों में रगदारी कमाई.

पप्पू देव साल 2003 में 50 लाख के नकली नोटों के साथ नेपाल में पकड़ा गया जहां करीब 11 साल तक वो नेपाल की जेल में बंद रहा. इसके बाद साल 2014 में पप्पू देव फिर पुलिस के हत्थे चढ़ा और 6 साल की जेल काटी. पप्पू देव ने राजनीति और ठेकेदारी में भी किस्मत आजमाने की कोशिश की. पप्पू देव ने 2020 में खगड़िया के परबत्ता से चुनाव लड़ा था वहीं उसकी पत्नी पूनम देव ने 2005 में भागलपुर से लोजपा के टिकट पर और 2015 में सहरसा सीट से चुनाव लड़ा.

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