बिहार में कंडक्टर को लाइसेंस लेना अनिवार्य, फिर भी सिर्फ 10 कंडक्टरों के पास लाइसेंस

Smart News Team, Last updated: Sun, 7th Feb 2021, 8:08 PM IST
  • बिहार सरकार ने बस के कंडक्टरों को लाइसेंस लेना अनिवार्य किया है. इसके बावजूद पूरे बिहार में 50 हजार बसें चल रही हैं लेकिन सिर्फ 10 कंडक्टरों के पास ही लाइसेंस है.
बिहार में 2015 से 2021 के बीच सिर्फ दो कंडक्टर ने ही लाइसेंस लिया है. प्रतीकात्मक तस्वीर

पटना. बिहार की बसों में यात्रियों से किराया लेने वाले ज्यादातर कडंक्टर अवैध हैं. उनके पास कंडक्टर का लाइसेंस नहीं है. बिहार सरकार ने कंडक्टर को लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है. इसके बावजूद बिहार में सिर्फ 10 कंडक्टरों के पास ही लाइसेंस है. ऐसे में अगर कोई कंडक्टर बदतमीजी करता है तो जब लाइसेंस ही नहीं है तो किसे रद्द करके सजा दी जाएगी. 

एक आकलन के अनुसार, बिहार में 17 सीटों से लेकर स्लीपर की 62 सीट वाली बसों की संख्या लगभग 60 हजार है. इस बारे में बिहार मोटर्स ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद ने कहा कि टिकट वसूलने वाले कंडक्टरों को लाइसेंस लेने का प्रावधान है और इसका पालन होना चाहिए लेकिन इसमें बस मालिकों की कोई भूमिका नहीं है. कानून का पालन करवाना प्रशासन का दायित्व है.

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परिवहन अधिनियम के प्रावधान के मताबिक, बस ड्राइवर के साथ कंडक्टरों को भी लाइसेंस लेना है. सरकार का मानना है बस में कंडक्टर यात्रियों से अच्छा व्यवहार करे इसलिए लाइसेंस को अनिवार्य कर दिया गया है. लाइसेंस लेने पर कोई शिकायत करे तो उसका लाइसेंस रद्द करके सजा दी जा सकती है लेकिन बिहार में सिर्फ कंडक्टरों के पास ही लाइसेंस हैं. मिली जानकारी के अनुसार, बिहार में 2015 से 2021 तक सिर्फ दो कंडक्टर ने ही लाइसेंस लिया है.

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बिहार में बस के कंडक्टर के लाइसेंस के लिए न्यूनतम योग्यता मैट्रिक रखी गई है. लाइसेंस जारी करते समय चरित्र को भी देखा जाता है. लाइसेंस जारी करने की जिम्मेदारी प्रमंडलीय आयुक्त को दी गई है. लाइसेंस लेने का शुल्क बहुत कम है इसके बावजूद कंडक्टर लाइसेंस नहीं ले रहे हैं.

 

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