झारखंड सरकार ने पेंशन मद के 975 करोड़ का नहीं किया भुगतान, बिहार के वित्त मुख्य सचिव ने लिखा पत्र

Haimendra Singh, Last updated: Mon, 20th Dec 2021, 10:23 AM IST
  • बिहार सरकार के वित्त अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर पेंशन के 975 करोड़ रुपए बकाया के भुगतान की मांग की है. उनका कहना है कि पिछले तीन सालों में सरकार ने पेंशन का एक भी रुपया नहीं दिया है.
बिहार और झारखंड सरकार में पेंशन को लेकर हो रहा विवाद. ( सांकेतिक फोटो)

पटना. बिहार और झारखंड सरकार के पेंशन दायित्व के बंटवारे को लेकर फिर से तकरार शुरू हो गया है. 2018-19 से लेकर 2020-21 तक के 3 वित्तीय वर्षों में झारखंड ने बिहार को एक भी पैसे का भुगतान नहीं किया है जिसके कारण पेंशन की बकाया राशि अब 975 करोड़ हो गई है. इसके लेकर बिहार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ ने झारखंड के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह सुखदेव सिंह को एक पत्र लिखा है. पत्र में वित्त विभाग अपर मुख्य सचिव ने लिखा है कि पिछले तीन सालों में पेंशन का एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया गया है. 

पत्र को याद दिलाते हुए वित्त अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि केंद्रीय गृह सचिव की मध्यस्थता में यह फैसला हुआ था कि पेंशन दायित्व की गणना महालेखाकार की ओर से की जाएगी. महालेखाकार कार्यालय के सत्यापित आंकड़े की प्रति भी झारखंड सरकार को भेजी गई है जिसका कोई परिमाण नहीं निकला है. उन्होंने कहा, कि केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बिहार और झारखंड के मुख्य सचिव की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने तक जनसंख्या अनुपात से ही भुगतान करना तय किया गया है.  इस फैसले पर सहमत होने के बाद भी झारखंड ने पिछले 3 साल से कोई धनराशि का भुगतान नहीं किया.

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क्या है पेंशन दायित्व विवाद

साल 2000 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत झारखंड को बिहार से अलग करके राज्य बनाया गया. अगल राज्य बनने के बाद यह तय हुआ कि उस समय तक रिटायर्ड हुए कर्मचारियों की पेंशन का भुगतान दोनो राज्य में मौजूद कर्मचारियों की सख्या के अनुपात में किया जाएगा. जिसपर दोनों सरकार में रजामंदी हो गई. लेकिन पिछले कुछ सालों पहले झारखंड सरकार के नेता ने पेंशन बटवारे के अनुपात फार्मूले पर सवाल उठाए और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. विवाद का निपटारा करने के लिए केंद्रीय गृह सचिव ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक बुलाकर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने तक आबादी के अनुपात में झारखंड के पेंशन दायित्व का भुगतान करने के लिए सहमत कराया. इस बिहार सरकार का कहना है कि पिछले 3 सालों में उससे 975 करोड़ रुपए के बकाया का भुगतान नहीं किया गया है.

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