बिहार में 'दंगा' नहीं चलेगा, सांप्रदायिक हिंसा से अलग मारपीट का IPC नाम बदलने की पहल

Smart News Team, Last updated: Fri, 23rd Jul 2021, 6:58 PM IST
  • बिहार में थाना और कोर्ट की कानूनी भाषा में ‘दंगा’ को सांप्रदायिक दंगों से अलग दिखाने के लिए आईपीसी से ‘दंगा’ शब्द को हटाने की कवायद तेज हो गई है. बिहार सरकार केंद्र सरकार को आईपीसी में दंगा शब्द का नाम बदलने की सिफारिश भेज रही है.
बिहार से दंगा शब्द हटाने की कवायद तेज, नीतीश सरकार केंद्र को भेजेगी पत्र(प्रतीकात्मक फोटो)

पटना. बिहार में क्राइम रिकॉर्ड से ‘दंगा’ कम करने की कवायद चल रही है. बिहार सरकार सांप्रदायिक दंगों और पांच या उससे ज्यादा लोगों की मारपीट वाले दंगों को अलग-अलग दिखाने के लिए नाम बदलने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज रही है. भारतीय दंड संहिता यानी इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 146, 147 और 149 में दंगा या बलवा (Rioting) का जिक्र है. पुलिस इस सेक्शन में वो केस दर्ज करती है जब पांच से ज्यादा लोगों का समूह मार-पीट कर ले जिसे कानूनी किताब में दंगा कहा गया है. 

जब NCRB के क्राइम रिकॉर्ड जारी होते हैं तो कई बार राज्यों में दंगों के केस काफी दिखते हैं जो वास्तविकता में सांप्रदायिक दंगों के बदले दो परिवार, दो समूह या दो गैंग के बीच मारपीट के मामले होते हैं जिसमें शामिल लोगों की संख्या 5 या उससे ज्यादा रही हो. नीतीश सरकार की यह पहल अगर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पसंद आती है तो IPC में आपसी मारपीट वाले दंगों के लिए एक नया नाम आ सकता है जिससे क्राइम की किताब और रिपोर्ट में दंगों में सिर्फ वो दंगे ही जोड़े और दर्ज किए जाएं जिसे दुनिया दंगा समझती है.

आईपीसी के सेक्शन 146 और 147 बिना हथियार के पांच या उससे ज्यादा लोगों की मारपीट के ‘दंगा’ केस में इस्तेमाल होते हैं जिसकी अधिकतम सजा 2 साल है. जब यही ‘दंगा’ हथियार से लैस होकर किया जाए तो सेक्शन 148 लग जाता है जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा है. जुर्माना दोनों में सजा के साथ लगाया या नहीं लगाया जा सकता है. 

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बिहार पुलिस ने सेक्शन 146 से 148 तक के दंगा जैसे मामलों को दूसरा नाम देने की सिफारिश की थी जिसे राज्य सरकार के गृह विभाग ने स्वीकार कर लिया है. अब राज्य सरकार अपनी सिफारिश केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेजेगी. पांच या अधिक लोग लाठी-डंडों, हथियार से लैस होकर मारपीट करते है तो यह दंगा की श्रेणी में रखा जाता है. यह मारपीट सार्वजनिक स्थान पर हो या किसी निजी स्थल पर दोनों सूरत में इसे दंगा नाम दिया जाता है. मारपीट छोटे समूह में ही क्यों न हुई हो लेकिन दंगा शब्द लगते ही केस भारी-भरकम लगने लगता है.

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