खुफिया रिपोर्ट: बिहार में तेजी से पैर पसार रहा आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Tue, 4th Jan 2022, 6:03 PM IST
  • बिहार में तेजी से आतंकी संगठन आईएसआई के इंडियन मुजाहिद्दीन विंग के फैलने की खुफिया जानकारी मिली है. इंडो-नेपाल सीमाई इलाकों में तैनात एसएसबी के जवानों ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट के जरिए सूचित किया है. जिसके बाद से इन इलाकों में सुरक्षा ऐजेंसियों द्वारा चौकसी बढ़ा दी गई है.
प्रतीकात्मक फोटो

पटना. नए साल 2022 में इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) ने बिहार-बंगाल समेत इंडो-नेपाल के सीमाई इलाकों में 2 सौ से अधिक स्लीपर सेल के सदस्यों को तैयार करने का टारगेट बनाया है. सीमाई इलाकों में तैनात खुफिया विभाग ने गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजकर ये जानकारी दी है. एसएसबी ने गृह मंत्रालय को इंडो-नेपाल सीमाई इलाकों में बसे कुछ संदेहास्पद लोगों की सूची भेजी है. जिसके चलते सीमाई इलाकों में भारतीय सुरक्षा ऐजेंसियों द्वारा चौकसी बढ़ा दी गई है. बताया जा रहा है कि सीमाई इलाकों में चप्पे-चप्पे पर एसएसबी के जवानों द्वारा हर वक्त कड़ी निगरानी रखी जा रही है.

गौरतलब हो कि पड़ोसी सीमाई मुल्क नेपाल में मौजूद आईएसआई एजेंट के द्वारा फंडिंग मुहैया कराकर राज्य के नाबालिग बेरोजगार यवुओं को गुमराह किया जाता है. इन युवाओं को आईएसआई एजेंट द्वारा बहकावे में लेकर स्लीपर सेल के सदस्यों के तौर पर तैयार किया जा रहा है. खास बात यह है कि शुरुआती दिनों में युवाओं को अपने जाल में फांसने के लिए आईएसआई एजेंट इन्हें सभी तरह की सुविधा मुहैया करवाते हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, हाल के दिनों में जांच एजेंसीयों द्वारा उज़्बेकिस्तान की युवतियों को जोगबनी इंट्री ग्रेटेड चेक पोस्ट के समीप से दबोच लिया गया था. पूछताछ में इन विदेशी युवतियों ने जांच एजेंसी को कई तरह की गुप्त जानकारी दी थी. बता दें कि पिछले कई सालों से सिमाई इलाकों में बतौर स्लीपर सेल सदस्य ढेरों की संख्या में अफगानिस्तान के नागरिक भी सक्रिय रहे हैं.

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बिहार पुलिस तमाम कोशिशों के बावजूद भी कटिहार में बसे 8 से ज्यादा अफगानिस्तान के नागरिकों के पकड़ने में नाकामयाब रही है. इसे लेकर खुफिया विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि कटिहार से फरार हुए अफगानी नागरिक इंडो-नेपाल के सिमाई इलाकों में अपना डेरा डाल रखा है. बताया जा रहा है कि देश के सामाई इलाकों में बसे गरीब ग्रामीण लड़कियों से शादी कर ये विदेशी नागरिक काफी आसानी से यहां का आधिकारिक आईडी बनवा लेते हैं.

स्लीपर सेल का सदस्य कौन होता है और क्या करता है ?

स्लीपर सेल के सदस्य देश विरोधी शक्तियों के लिए काम करते हैं. ये औरों की तरह आम लोगों के बीच घुल मिलकर रहते हैं. स्लीपर सेल के सदस्य रहते आम लोगो की तरह हैं मगर वे काम दूसरे के इशारे पर करते है. स्लीपर सेल के सदस्यों को जो शख्स गाइड करता है उसका मकसद देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना होता है यही कारण हा कि वह इस सदस्यों को बहका कर भारत विरोधी काम करवाने में सफल हो पाते हैं. एजेंट, स्लीपर सेल के सदस्यों के जरिए समय-समय पर गुप्त जानकारी के अलावा सामाजिक, समीकरण जनसंख्या, नाबालिग, युवकों की संख्या और  गरीब लोगों की जानकारी निकलवा लेता है. स्थानीय प्रशासन को स्लीपर सेल के सदस्यों की पहचान कर पाना काफी चुनौतीयों से भरा काम होता है क्योंकि ये सब आम लोगों की तरह उनके बीच रचे बसे रहते हैं.

नेपाल में है नकली भारतीय करेंसी का स्टॉक

पुलिस और एसएसबी के जवानों द्वारा महीने राज्य के अररिया जिले से नकली नोटों की करेंसी मिलती है. इन नकली नोटों का कनेक्शन पड़ोसी मुल्क नेपाल से होता है. जानकारी के मुताबिक, नेपाल में आईएसआई एजेंट के सरगना द्वारा काफी मात्रा में नकली भारतीय करेंसी का स्टॉक इकट्ठा किया गया है. बताया जा रहा है कि उत्तर भारत के क्षेत्रों में नकली नोट भेजने के लिए बिहार के सीमांचल इलाके का ही इस्तेमाल किया जाता है.

पड़ोसी मुल्कों के रवैए से भारतीय सुरक्षा एजेंसीयां काफी अलर्ट हैं

बता दें कि हाल के कुछ सालों में चीन की दखअंदाज़ी पड़ोसी देश नेपाल में बढ़ी है. बताया जाता है कि इन दिनों नेपाल में भारत विरोधी काम करने वाले संगठनों को चीन बढ़ावा दे रहा अड्डा है. जिसके चलते भारतीय सुरक्षा एजेंसीयां हमेशा अलर्ट रहती है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसीयों को किसी भी तरह की गुप्त सूचना मिलती है तो वह तुरंत केन्द्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट की जाती है. इस रिपोर्ट पर सक्रियता दिखाते हुए उसे फॉलोअप को साथ साथ कार्यवाई भी किया जाता है. 

गौरतलब हो कि नेपाल की जनता और सरकार को विश्वास में लेकर भारत से सटे इलाकों में भारतीयों के खिलाफ चीन द्वारा लगातार कई तरह के कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है. जिसका विरोध खुद नेपाल की जनता और भारत के लोग करते आ रहे हैं.

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