बिहार चुनाव: भगवा दुर्ग ढहाने को विपक्ष की नई सेना, BJP पुराने सिहपसलारों के साथ

Smart News Team, Last updated: Tue, 20th Oct 2020, 8:06 AM IST
  • बिहार विधानसभा चुनाव के लिए विपक्ष ने महागठबंधन तैयार किया है. भगवा दुर्ग ढहाने को विपक्ष ने इसमें नई सेना तैयार की है. वहीं बीजेपी ने पुराने सिहपसलारों को साथ रखा है उन्हीं पर एक बार फिर भरोसा जताया है. दो साल पहले हुए जलजमाव पर भी नीतीश कुमार सरकार को घेरने की तैयारी की गई है. 
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन तैयार हो गया है. विपक्ष ने इस चुनाव के लिए नई सेना खड़ी की है. 

पटना. रंजीत सिंह

राजधानी में चुनावी चौसर सज चुका है. अपने किले की रक्षा के लिए भाजपा ने अपने पुराने लड़ाकों पर ही भरोसा जताया है. मुकाबले को विपक्ष नई आस और नई सेना के साथ मैदान में ताकत झोंके हुए है. ऐसे उसकी सबसे ज्यादा आस पटना की जनता को डराने वाले जलजमाव रूपी हथियार से है. आस हो भी क्यों न, आखिर इसके भरोसे वह पिछले दो साल से भाजपा के दुर्ग में सेंधमारी करने में लगा है. राजद, कांग्रेस, जाप सभी इस मुद्दे से अपनी तलवार को धार दे रहे हैं. जाप प्रमुख पप्पू यादव तो ट्रैक्टर लेकर जनता के बीच जा चुके हैं. यही कारण है कि आम भाजपाई भी इस मुद्दे के वार को महसूस कर रहे हैं. कंकड़बाग, राजेन्द्र नगर, बाजार समिति ही नहीं एसके पुरी, पाटलिपुत्रा, पटेल नगर की जनता के मन की अकुलाहट को भी भांप रहे हैं.

हालांकि भाजपा के रणनीतिकार विपक्षी मोहरे को देख थोड़े निश्चिंत दिखने लगे हैं. जनता के बीच विपक्षी उम्मीदवार को बाहरी कहकर प्रचारित कर रहे हैं. उनके आश्वस्त होने का एक कारण शहरी पटना का मिजाज भी है. दरअसल, राज्य के हरेक कोने से आकर बसे लोगों के मिजाज ने हमेशा भाजपा का साथ दिया है, लालू जब अपने शीर्ष पर थे तब भी राजधानी में भगवा ही फहराता रहा. नंदकिशोर यादव पहले के पटना ईस्ट और अब के पटना साहिब पर छह बार जीत दर्ज कर चुके हैं. कुम्हरार विधायक अरुण सिन्हा पांचवीं बार जीत दर्ज करने और बांकीपुर के प्रत्याशी नितिन नवीन हैट्रिक लगाने को आतुर हैं. दीघा से संजीव चौरसिया अपनी पारी दोहराने उतरे हैं.

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विपक्ष को देखा जाय तो महागठबंधन में पटना सिटी के कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण कुमार भागलपुर के रहने वाले हैं तो कुम्हरार से राजद उम्मीदवार धर्मेंद्र चंद्रवंशी पार्टी कार्यकर्ताओं को ही एकजुट करने में लगे हैं, बांकीपुर से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा इस बार मैदान में हैं उनके पिता शत्रुघ्न सिन्हा यहां से सांसद रह चुके हैं. इन सबके बीच दीघा से माले की शशि यादव चुनौती दे रही हैं. अब देखना है कि भाजपा के अभेद्य किले में सुराग कर पाने में विपक्ष कितना सफल होगा, यह तो 10 नवंबर का परिणाम बताएगा,

1995 से फहरा रहा है भगवा

राजधानी में पहले तीन सीट हुआ करती थी. इसे पटना पूरब, पटना मध्य और पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था. 1990 तक यहां कांग्रेस और जनता दल के उम्मीदवार जीत दर्ज करते रहे थे. मंदिर आंदोलन के बाद 1995 के चुनाव में तीनों सीट भाजपा के पास आई. तभी से यहां भगवा ही फहरा रहा है. 1995 में पटना पूरब से नंदकिशोर यादव, पटना मध्य से सुशील मोदी और पटना पश्चिम से नवीन किशोर सिन्हा जीते थे. वर्ष 2010 विधानसभा चुनाव से यहां चार सीटों के लिए चुनाव हो रहा है. 2010 में यहां की तीन सीटें पटना साहिब, कुम्हरार और बांकीपुर भाजपा के खाते में तो दीघा जदयू के खाते में गई. भाजपा-जदयू के अलग होने के बाद 2015 में चारों सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया.

प्रिया और लव का मुकाम भी होगा तय

नए चेहरे के चलते बांकीपुर का चुनाव जरूर रोचक बन गया है. पूरे बिहार की नजर न सिर्फ इसपर टिकी है, बल्कि इसका परिणाम नए आयाम भी गढ़ेगा. सीएम की स्वघोषित उम्मीदवार पलूरल्स की पुष्पम प्रिया चौधरी और शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे और कांग्रेस उम्मीदवार लव सिन्हा के सियासी सफर का मुक़ाम भी यह तय करेगा.

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पटना के लिए पानी का मुद्दा पुराना

ऐसा नहीं है कि पानी का मुद्दा पुराना है. पटना मध्य सीट से विधायक रहे सुशील कुमार मोदी जलजमाव मुद्दे को लेकर काफी आंदोलन करते रहे हैं. जलजमाव और जलसंकट दोनों से यहां की हजारों आबादी परेशान है. पटना सिटी इलाके में जलसंकट की समस्या है तो राजेंद्र नगर, कंकड़बाग, बाजार समिति, कदमकुआं, मछुआ टोली, शिवपुरी, एसकेपुरी, पाटलिपुत्रा आदि इलाके के लोग जलजमाव से परेशान रहते हैं. हर बार चुनाव में जलजमाव मुद्दा बनता है. नेता वादे करते हैं. पांच साल तक नाला निर्माण, नाला मरम्मत आदि में बीत जाता है.समस्या धरी की धरी रह जाती है. इस बार भी सभी नेता जलजमाव दूर करने के लिए अपने-अपने तरीके से वादे कर रहे हैं.

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