जातिगत जनगणना के मसले पर बिहार में सियासत तेज, केंद्र के रवैये के विरोध में विपक्ष से लेकर एनडीए गठबंधन के भी दल

Shubham Bajpai, Last updated: Sat, 25th Sep 2021, 2:30 PM IST
  • बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर सियासत तेज हो गई है. जातिगत जनगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दिए शपथपत्र के बाद से बिहार के कई दल आंदोलन तक की चेतावनी दे रहे हैं. इसमें विपक्ष के साथ बिहार में एनडीए गठबंधन में शामिल 3 दल भी केंद्र सरकार के रवैये का विरोध कर रह हैं.
जातिगत जनगणना के मसले पर बिहार में सियासत तेज (फोटो सभार पीटीआई)

पटना. बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लगाए शपथ पत्र के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस मसले में बिहार में भाजपा के विरोधी दल के साथ एनडीए गठबंधन में शामिल जनता दल यूनाइटेड, विकासशील इंसान पार्टी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा दल भी केंद्र की भाजपा सरकार के रवैये और सुप्रीम कोर्ट में पेश शपथ पत्र का विरोध कर रही है. वहीं, इस विरोध से बिहार के राजनीति के समीकरण भी बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं. क्योंकि राजद के विधायक भाई वीरेंद्र कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अब एनडीए में बने रहने पर सोचना चाहिए.

एनडीए में बने रहने के बारे में सोचे नीतीश कुमार

जदयू विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि एनडीए में बने रहने के लिए सीएम नीतीश कुमार को सोचना चाहिए. साथ ही जदयू के संसदीय कार्य एवं शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि जातिगत जनगणना अब भी संभव हैं. ये बात किसी ने नहीं की है कि 2011 में जो जनगणना हुई वह गलत है. उस वक्त की जनगणना को लेकर कहा गया था कि उसमें बड़े स्तर पर गलतियां हैं.

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भाजपा और आरएसएस को पिछड़ों से नफरत

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद ने इस मसले पर कहा कि भाजपा और आरएसएस पिछड़ों और अतिपिछड़ों से नफरत करती है. लालू ने कहा कि ये सरकार सांप, बिच्छू, तोता, मैना, हाथी, घोड़ा, कुत्ता, बिल्ली सबको गिन लेंगे. यहां तक पेड़-पौधे और पशु-पक्षी भी गिन लिए जाएंगे, लेकिन पिछड़े-अति पिछड़े वर्ग के इनसानों की गिनती नहीं होगी. ऐसे सांसदों और मंत्रियों पर धिक्कार है जो जनगणना फार्म में एक अतिरिक्त कालम जोड़कर लोगों की जाति का पता नहीं कर सकती है.

भाजपा का  स्टैंड पहले से रहा कि देश में न हो जातिगत जनगणना

भाकपा विधायक सूर्यकांत पासवान के कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात हुई थी, तब उन्होंने सकरात्मक संकेत दिए थे. लेकिन वो उसके पक्ष में अब नहीं दिख रहे हैं. भाजपा का तो पहले से स्टैंड रहा है कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए. राज्य सरकार जातिगत जनगणना अपने स्तर से कराए, इसके लिए मुख्यमंत्री को पहल करनी चाहिए.

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जातिगत जनगणना पर झूठ बोल रहे

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जातिगत जनगणना पर झूठ बोल रहे हैं. उन्हें बिहार से गए प्रतिनिधिमंडल को उस वक्त ही साफ कहना चाहिए था कि जातिगत जनगणना उनकी नीति के खिलाफ है. वहीं, वीआईपी के नेता मुकेश साहनी का कहना है कि सीएम को राज्य में जातिगत जनगणना करना चाहिए. हम उनकी मदद करेंगे.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि 2011 की जनगणना में तमाम तरह की विसंगतियां आने के बाद यह तय है कि फिलहाल जनगणना में जातियों की गणना नहीं कराई जा सकती है. इसको लेकर सरकार ने कोर्ट में शपथ पत्र दायर किया है. जिसके बाद भाजपा को छोड़कर बिहार के सभी दल केंद्र सरकार के खिलाफ हैं.

 

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