पुलिस ने ठाना साइबर क्राइम को खत्म करना, ट्रेनिंग सेंटर व फोरेंसिक लैब की तैयारी

Smart News Team, Last updated: Fri, 7th Jan 2022, 10:02 AM IST
  • आजकल आए दिन फ्रॉड, धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं. इस बीच बिहार राज्य में साइबर क्राइम से निपटने के लिए पुलिस न सिर्फ प्रशिक्षण पर ध्यान केन्द्रीत कर रही है, बल्कि अत्याधुनिक लैब का भी निर्माण किया जा रहा है. आर्थिक अपराध इकाई के अधीन जल्द ही बिहार पुलिस का साइबर फोरेंसिक लैब बनकर तैयार हो जाएगी. लैब के निर्माण पर करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च होंगे.
पुलिस ने ठाना साइबर क्राइम को खत्म करना, ट्रेनिंग सेंटर व फोरेंसिक लैब की तैयारी

आजकल आए दिन फ्रॉड, धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं. इस बीच बिहार राज्य में साइबर क्राइम से निपटने के लिए पुलिस न सिर्फ प्रशिक्षण पर ध्यान केन्द्रीत कर रही है, बल्कि अत्याधुनिक लैब का भी निर्माण किया जा रहा है.आर्थिक अपराध इकाई के अधीन जल्द ही बिहार पुलिस का साइबर फोरेंसिक लैब बनकर तैयार हो जाएगी. लैब के निर्माण पर करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च होंगे.

लैब के लिए भवन निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा. इस बीच फोरेंसिक लैब के लिए जरूरी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की खरीद भी कर ली गई है. इस लैब में जहां जटिल साइबर अपराध के मामलों को सुलझाने में मदद मिलेगी वहीं पुलिस अधिकारियों को तकनीकी जानकारों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा. 

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साइबर फोरेंसिक लैब के बन जाने से साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच में न सिर्फ सहूलियत होगी, बल्कि इसमें तेजी भी आएगी. वहीं बिहार पुलिस की फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री पर भी नमूनों की जांच के लिए निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. निर्माणाधीन लैब सिर्फ व सिर्फ साइबर अपराध से जुड़े नमूनों की जांच करेगी. साइबर अपराध का जरिया मोबाइल फोन, कंप्यूटर या लैपटॉप है. इनकी जांच के लिए साइबर फोरेंसिक लैब में इससे जुड़े उपकरण विशेष तौर पर होते हैं.

साइबर अपराध का अनुसंधान आसान नहीं होता, चूंकि साइबर अपराध की कोई सीमा नहीं होती और न ही इसमें शामिल अपराधी दिखाई पड़ते हैं. लिहाजा पहला काम उस डिवाइस को लोकेट करना होता है जिसके जरिए साइबर अपराध को अंजाम दिया गया. इसके अलावा डिजिटल साक्ष्य को संकलित करना और उन्हें सुरिक्षत रखना भी बड़ी चुनौती होती है.

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ऐसे में जरूरी है कि अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी भी तकनीकी रूप से दक्ष हों. वैसे तो साइबर अपराध को सुलझाने के लिए पहले ही पुलिस अफसरों को ट्रेनिंग दी जा रही है पर साइबर फोरेंसिक लैब के तैयार होने के बाद उन्हें और भी बेहतर प्रशिक्षण दिया जा सकेगा साथ ही वह लैब में कई अत्याधुनिक तकनीकों से भी वाकिफ हो पाएंगे. अभियोजन पदाधिकारियों व न्यायिक पदाधिकारियों को भी समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है.

मोबाइल फोन फोरेंसिक मशीन के जरिए मोबाइल से डिलीट की गई तस्वीर, चैट व तमाम चीजों को दुबारा वापस लाया जा सकता है. डिस्क फोरेसिक उपकरण के जरिए कंप्यूटर या लैपटॉप के डिस्क से डिलिटेड डाटा को रिकवर किया जाता है. वहीं ऐसे भी उपरकरण व सॉफ्टवेयर होते हैं, जिससे धुंधली तस्वीरों को साफ कर देखा जा सकता है.

आजकल आए दिन फ्रॉड, धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं. इस बीच बिहार राज्य में साइबर क्राइम से निपटने के लिए पुलिस न सिर्फ प्रशिक्षण पर ध्यान केन्द्रीत कर रही है, बल्कि अत्याधुनिक लैब का भी निर्माण किया जा रहा है.आर्थिक अपराध इकाई के अधीन जल्द ही बिहार पुलिस का साइबर फोरेंसिक लैब बनकर तैयार हो जाएगी. लैब के निर्माण पर करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च होंगे.

लैब के लिए भवन निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा. इस बीच फोरेंसिक लैब के लिए जरूरी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की खरीद भी कर ली गई है. इस लैब में जहां जटिल साइबर अपराध के मामलों को सुलझाने में मदद मिलेगी वहीं पुलिस अधिकारियों को तकनीकी जानकारों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा. 

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साइबर फोरेंसिक लैब के बन जाने से साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच में न सिर्फ सहूलियत होगी, बल्कि इसमें तेजी भी आएगी. वहीं बिहार पुलिस की फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री पर भी नमूनों की जांच के लिए निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. निर्माणाधीन लैब सिर्फ व सिर्फ साइबर अपराध से जुड़े नमूनों की जांच करेगी. साइबर अपराध का जरिया मोबाइल फोन, कंप्यूटर या लैपटॉप है. इनकी जांच के लिए साइबर फोरेंसिक लैब में इससे जुड़े उपकरण विशेष तौर पर होते हैं.

साइबर अपराध का अनुसंधान आसान नहीं होता, चूंकि साइबर अपराध की कोई सीमा नहीं होती और न ही इसमें शामिल अपराधी दिखाई पड़ते हैं. लिहाजा पहला काम उस डिवाइस को लोकेट करना होता है जिसके जरिए साइबर अपराध को अंजाम दिया गया. इसके अलावा डिजिटल साक्ष्य को संकलित करना और उन्हें सुरिक्षत रखना भी बड़ी चुनौती होती है.

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ऐसे में जरूरी है कि अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी भी तकनीकी रूप से दक्ष हों. वैसे तो साइबर अपराध को सुलझाने के लिए पहले ही पुलिस अफसरों को ट्रेनिंग दी जा रही है पर साइबर फोरेंसिक लैब के तैयार होने के बाद उन्हें और भी बेहतर प्रशिक्षण दिया जा सकेगा साथ ही वह लैब में कई अत्याधुनिक तकनीकों से भी वाकिफ हो पाएंगे. अभियोजन पदाधिकारियों व न्यायिक पदाधिकारियों को भी समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है.

मोबाइल फोन फोरेंसिक मशीन के जरिए मोबाइल से डिलीट की गई तस्वीर, चैट व तमाम चीजों को दुबारा वापस लाया जा सकता है. डिस्क फोरेसिक उपकरण के जरिए कंप्यूटर या लैपटॉप के डिस्क से डिलिटेड डाटा को रिकवर किया जाता है. वहीं ऐसे भी उपरकरण व सॉफ्टवेयर होते हैं, जिससे धुंधली तस्वीरों को साफ कर देखा जा सकता है.

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