लालू बोले- चिराग ही हैं पासवान की LJP के नेता, चाहता हूं कि तेजस्वी गठबंधन करें

Smart News Team, Last updated: Tue, 3rd Aug 2021, 5:59 PM IST
  • बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय जनता दल और चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी में गठबंधन हो सकता है. आरजेडी संस्थापक लालू यादव ने कहा है कि चिराग और तेजस्वी साथ आएं. लालू का यह बयान उनकी पार्टी राजद की राजनीतिक दिशा तय करेगी जिसमें गेंद अब चिराग के पाले में है कि वो तेजस्वी से हाथ मिलाते हैं या नहीं.
चिराग ही हैं पासवान की LJP के नेता, चाहता हूं कि तेजस्वी गठबंधन करें: लालू प्रसाद यादव

पटना. बिहार में राजनीतिक परिवार के वारिस दो नौजवान नेता तेजस्वी यादव और चिराग पासवान एक साथ आएं और गठबंधन करें, ये आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की चाहत है. लालू ने दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव से मुलाकात के बाद मीडिया से कहा कि रामविलास पासवान के निधन के बाद लोजपा में जो भी हुआ है लेकिन चिराग पासवान ही एलजेपी के नेता हैं. जब पत्रकारों ने उनसे तेजस्वी यादव और चिराग पासवान के बीच गठबंधन पर पूछा तो लालू ने कहा- हां, मैं चाहता हूं कि दोनों साथ आएं.

शरद यादव से मुलाकात को लेकर राजद प्रमुख लालू यादव ने कहा कि वे शरद यादव की सेहत का हालचाल लेने गए थे. लालू यादव ने कहा कि वो, शरद यादव और मुलायम सिंह यादव कई मुद्दों पर एक साथ लड़े हैं. सोमवार को मुलायम सिंह यादव से मुलाकात को लालू ने शिष्टाचार मुलाकात बताई. वहीं पेगासस जासूसी कांड को लेकर लालू यादव ने कहा कि इस मामले में जांच जरूर होनी चाहिए. इसके पीछे छुपे लोगों का नाम बाहर आना चाहिए.

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राम विलास पासवान के गुजर जाने के बाद चिराग पासवान लोजपा को संभाल रहे थे. उनके चाचा पशुपति पारस को यह रास नहीं आया और एलजेपी के पांच सांसदों का गुट बनाकर संसदीय दल के नेता बन गए. इसके बाद उन्होंने बिहार आकर खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया. चिराग एक समय खुद को हनुमान और पीएम मोदी को उनका राम बता चुके थे. फिर कहने लगे कि यदि हनुमान को कहना पड़े तो सुनाई दे तो फिर राम क्या ही राम हैं.

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बीजेपी की ओर मदद के लिए टकटकी लगाए चिराग को तब बड़ा झटका लगा जब पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट में पशुपति पारस को शामिल कर लिया. चिराग और बीजेपी का फिलहाल का साथ खत्म होता दिख रहा है और ऐसे में उनके लिए बिहार की चुनावी राजनीति में गठबंधन का विकल्प एक ही है और वो है महागठबंधन जिसमें चिराग पासवान को तेजस्वी यादव की सदारत कबूल करनी होगी.

क्या चिराग दिल्ली और तेजस्वी पटना के फॉर्मूले पर राजी होंगे ?

वैसे चिराग पासवान अपने पिता रामविलास पासवान की तरह केंद्र की राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं और तेजस्वी यादव का फोकस बिहार में सरकार बनाना और चलाना है. तेजस्वी और चिराग के लक्ष्य में पटना और दिल्ली का अंतर है लेकिन दोनों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा में ताल-मेल हो जाए तो आरजेडी और एलजेपी के चिराग गुट में गठबंधन हो सकता है. मसला यही है और मुश्किल भी यही कि तेजस्वी पटना से संतोष कर लें और चिराग दिल्ली में सेट हो जाएं. अगर ये फॉर्मूला दोनों ‘राजकुमार’ बना लें तभी गठबंधन हो सकता है और चल सकता है. 

चिराग लगातार पशुपति पारस के दावों को खारिज करते रहे और इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान कर रखा है. लोजपा दो गुटों में बंटी है जिसमें एक गुट चिराग पासवान का है तो दूसरा पशुपति पारस का. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी चिराग को साथ आने के संकेत दिए और अब लालू यादव ने अपनी इच्छा जगजाहिर कर दी है. यह तो वक्त ही बताएगा कि क्या चिराग तेजस्वी का हाथ थामेंगे.

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