नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद शिक्षक क्यों नहीं कर पा रहे ज्वॉइन, ये है वजह

Smart News Team, Last updated: Sat, 26th Feb 2022, 11:54 PM IST
  •  बिहार में 23 फरवरी से लगातार अंतिम रूप से चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान दिया जा रहा है कि लेकिन अब तक केवल 34 हजार अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति प्रमाण पत्र बांटा गया है. वहीं चयनित 8 हजार अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट कई नियोजन इकाइयों में होल्ड कर दिए गए हैं और उसकी जांच फिर से करने की बात कही जा रही है.
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी शिक्षक क्यों नहीं कर पा रहे ज्वॉइन

 पटना : बिहार में 23 फरवरी से लगातार अंतिम रूप से चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान दिया जा रहा है कि लेकिन अब तक केवल 34 हजार अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति प्रमाण पत्र बांटा गया है. वहीं चयनित 8 हजार अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट्स कई नियोजन इकाइयों में होल्ड कर दिए गए हैं, जिनकी जांच फिर से करने की बात कही जा रही है.

अंतिम रूप से चयनित 42 हजार शिक्षक अभ्यर्थियों में से अब तक सिर्फ 34 हजार अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति पत्र मिल सका है, जिसमें से चयनित 8 हजार अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र के हालात के बारे में बात की जाए, तो कई नियोजन इकाइयों में उन्हें होल्ड कर दिया गया है और होल्ड किए जाने के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि कई अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट की जांच फिर से की जा रही है.

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बताया जा रहा है कि प्रखंड नियोजन इकाई में अधिकतर नियुक्ति पत्र होल्ड किए गए हैं. सीतामढ़ी के रुन्नी सैदपुर प्रखंड में भी मैथ, साइंस और हिंदी के चयनित अभ्यर्थी अब तक डीईओ, डीपीओ और बीईओ ऑफिस में दौड़-भार कर रहे हैं.

अगर बात उन अभ्यर्थियों की करें, जिन्हें नियुक्ति पत्र मिल भी गया है, तो उन्हें मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए कई दिनों से सिविल सर्जन कार्यालय में चक्कर काटना पड़ रहा है. सिविल सर्जन कार्यालय में काफी भीड़ की वजह से अफरातफरी का माहौल बना है. वहीं अभ्यर्थियों की इस परेशानी से शिक्षक संघ भी नाराज हैं.

शिक्षक संघ गोपगुट के प्रदेश अध्यक्ष मार्कंडेय पाठक और प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पांडेय का कहना है कि 23 फरवरी को नियुक्ति पत्र पाए नवनियुक्त शिक्षकों को योगदान करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है . साथ ही यह प्रक्रिया भी सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों के प्रधानाध्यापकों को विद्यालय में योगदान कराने से पूर्व नियोजन इकाई के सचिव से नियुक्ति पत्र को सत्यापित करवाना पड़ता है, जबकि नियोजन इकाई के सचिव प्रधानाध्यापक/नवनियुक्त शिक्षक को समय ही नहीं दे रहे हैं और उनके द्वारा विभिन्न प्रकार का बहाना बना कर नियुक्ति पत्र को सत्यापित नहीं किया जा रहा है.

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